दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर सिंह बग्गा ने बीते शनिवार को ट्विटर पर अपना नाम बदलकर चौकीदार ‘तेजिंदर बग्गा’ कर लिया था. बग्गा का कहना था कि उन्होंने ऐसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ट्रेंड #MainBhiChowkidar को फॉलो करते हुए किया है. दिलचस्प यह रहा कि बग्गा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके बाद कई केंद्रीय मंत्रियों, भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और पार्टी के समर्थकों ने भी अपने नाम के आगे चौकीदार लगा लिया. इनमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री अरुण जेटली और रेल मंत्री पीयूष गोयल भी शामिल हैं.

अगर नेताओं और बाकी हस्तियों के सोशल मीडिया पर व्यवहार को देखें तो आम तौर पर होता यह है कि जो प्रोफाइल नेम वे एक प्लेटफॉर्म पर रखते हैं वही बाकी जगहों पर भी दोहराते हैं. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है. नरेंद्र मोदी समेत तमाम नेताओं और उनके समर्थकों ने ट्विटर पर तो अपना नाम बदल दिया है लेकिन इन सभी ने फेसबुक पर अपने नाम नहीं बदले हैं. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फेसबुक पर ‘मैं भी चौकीदार’ शीर्षक वाला एक वीडियो शेयर किया है लेकिन यहां पर वे भी सिर्फ नरेंद्र मोदी ही हैं, चौकीदार नरेंद्र मोदी नहीं.

इसे लेकर तरह-तरह की राय और तर्क हैं. इनमें से कुछ हवा-हवाई हैं और कुछ में कुछ तकनीकी आधार भी दिये-बताये जा रहे हैं. इनमें सबसे पहली राय यह है कि पिछले दिनों ट्विटर ने कई हजार दक्षिणपंथी विचारधारा वाले यूजर्स के अकाउंट सस्पेंड कर दिए थे. इसलिए भाजपा ने यहां पर अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए यह ट्रेंड शुरू किया है. ट्विटर पर आई कई टिप्पणियों में भी इस ट्रेंड की लोकप्रियता को भाजपा का शक्ति प्रदर्शन बताया गया है. जबकि फेसबुक पर अच्छी खासी संख्या में फॉलोअर्स होने के चलते, भाजपा को ऐसा करने की जरूरत नहीं है.

सोशल मीडिया के जानकारों की मानें तो इस ट्रेंड को केवल ट्विटर पर चलाए जाने की वजह ट्विटर और फेसबुक की यूजर पॉलिसी का अलग-अलग होना है. ट्विटर जहां किसी यूजर को अनगिनत बार नाम और हैंडल बदलने की अनुमति देता है, वहीं फेसबुक पर किसी यूजर का नाम सिर्फ दो से तीन बार ही बदला जा सकता है. पिछले कुछ समय से फेसबुक ने नाम बदलने के लिए आईडी प्रूफ देना भी जरूरी कर दिया है. यहां पर पहली बार नाम बदलने पर यूजर अगले 60 दिनों तक और दूसरी बार अगले 120 दिनों तक नाम नहीं बदल सकता है. इसके अलावा बार-बार नाम बदलने वाले यूजर के अकाउंट को फेसबुक सस्पेंड भी कर देता है.

साथ ही फेसबुक यूजर के पर्सनल प्रोफाइल पर तो बदला हुआ नाम तुरंत दिखाई देने लगता है लेकिन पेज का नाम बदलने पर फेसबुक इसके अप्रूवल में भी कुछ समय लगाता है. ऐसे में फेसबुक पर किसी भी ट्रेंड को शुरू करना और पॉपुलर बनाना ज्यादा वक्त लेने वाला साबित हो सकता है. ऐसा भी हो सकता है कि कुछ लोगों ने फेसबुक पर अपना नाम बदलने की रिक्वेस्ट डाल दी हो और उसका असर हमें आने वाले कुछ दिनों में देखने को मिले.

वैसे राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस ट्रेंड का लेना-देना आगामी चुनावों से है इसलिए भी ट्विटटर इसके लिए बिलकुल मुफीद जगह है. क्योंकि यहां पर जब भी जरूरत खत्म हुई, अपने नाम को बदला जा सकता है.