एक रोमांचक मैच की तरह ही ब्रिटेन के यूरोपीय संघ (ईयू) से बाहर होने की तारीख़ जैसे-जैसे करीब आ रही है, ब्रिटिश नागरिकों के साथ-साथ पूरी दुनिया इस घटनाक्रम के नतीजे पर टकटकी लगाए बैठ गई है. ब्रिटेन के ईयू से अलग होने की तारीख 29 मार्च है लेकिन दो हफ्ते पहले तक यह साफ़ नहीं हो सका है कि ऊंट किस करवट बैठेगा. यानी ब्रिटेन ईयू से एक समझौते के तहत बाहर होगा या फिर बिना किसी समझौते के.

बीते हफ्ते ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरेसा मे ने दूसरी बार ब्रेक्जिट मसौदा संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ़ कॉमन्स’ में पेश किया. कुछ बदलावों के साथ लाये गए इस मसौदे को भी सांसदों ने नकार दिया. इसके बाद गुरूवार को सांसदों ने इस बात पर मोहर लगा दी कि ब्रेक्जिट के मुद्दे पर दूसरा जनमत संग्रह नहीं होगा. साथ ही ईयू से यह मांग भी की कि ब्रिटेन को ब्रेक्जिट के लिए कम से काम तीन महीने की और मोहलत दी जाए.

बीते हफ्ते ब्रिटिश संसद में जो कुछ भी हुआ, उससे यह साफ़ है कि अधिकांश सांसद ब्रेक्जिट तो चाहते हैं, लेकिन वे प्रधानमंत्री टेरेसा मे द्वारा तैयार किए गए ब्रेक्जिट मसौदे पर राजी नहीं हैं. आइए जानते हैं कि बदलाव के साथ आया ब्रेक्जिट मसौदा क्या है, अभी भी सांसदों को किस बात पर आपत्ति है और इस हफ्ते इस मसले पर क्या कुछ होने की संभावना है?

कुछ बदलावों के बाद आया ब्रेक्जिट मसौदा क्या है?

ब्रेक्जिट मसौदा उन शर्तों को निर्धारित करता है जिनके तहत ब्रिटेन को ईयू से अलग होना है. ब्रिटेन और ईयू के बीच तैयार हुए मसौदे के अनुसार 29 मार्च को ब्रिटेन के ईयू से अलग होने के तुरंत बाद एक ‘ट्रांजिशन पीरियड’ शुरू होगा जिसकी अवधि 31 दिसंबर, 2020 तक होगी. इस अवधि में ब्रिटेन और ईयू उन मुद्दों को सुलझाएंगे जिन पर दोनों के बीच अब तक सहमति नहीं बनी है. ‘ट्रांजिशन पीरियड’ के दौरान ब्रिटेन ईयू के ‘कस्टम यूनियन’ प्रणाली सहित कई संस्थानों का सदस्य बना रहेगा और उसे इनके नियम-कानूनों का पालन करना होगा.

टेरेसा मे के मसौदे के अनुसार, ब्रिटेन को अपने सभी वित्तीय दायित्वों को निपटाने के लिए किस्तों में यूरोपीय संघ को लगभग 39 बिलियन पाउंड का भुगतान करना होगा. इसमें यह भी कहा गया है कि ब्रिटेन में ईयू के नागरिक और ईयू में ब्रिटेन के नागरिकों के निवास और सामाजिक सुरक्षा अधिकार बरक़रार रहेंगे. मसौदे में ‘बैकस्टॉप’ के प्रावधान को बरकरार रखा गया है.

बैकस्टॉप का प्रावधान क्या है?

ब्रेक्जिट को लेकर जब ब्रिटेन और ईयू के बीच दो साल पहले बातचीत शुरू हुई थी, तब लगभग सभी का यह कहना था कि इस मामले में जो सबसे ज्वलंत मुद्दा होगा वह ब्रिटेन के राज्य उत्तरी आयरलैंड और पड़ोसी देश आयरलैंड गणराज्य की सीमा का होगा. इन लोगों के ऐसा कहने की वजह भी थी. दरअसल, 90 के दशक में उत्तरी आयरलैंड अलगाववाद और आतकंवाद की आग में जला था. यहां दो तरह के गुट हैं, एक वह जो चाहता है कि उत्तरी आयरलैंड ब्रिटेन के साथ रहे और दूसरा कैथोलिक समूह, जो आयरलैंड गणराज्य में उत्तरी आयरलैंड का विलय चाहता है. इन दोनों के बीच लम्बी हिंसा के बाद 1998 में ब्रिटेन और आयरलैंड गणराज्य के बीच एक समझौता हुआ जिसे ‘गुड फ्राइडे’ समझौता कहा जाता है. इस समझौते के तहत दोनों देश उत्तरी आयरलैंड की सीमा खुली रखने पर सहमत हुए. इस समझौते के बाद से ब्रिटेन के उत्तरी आयरलैंड राज्य में हिंसा खत्म हो गई.

लेकिन, अब समस्या यह है कि अगर भविष्य में ब्रिटेन और ईयू के बीच ब्रेक्जिट को लेकर कोई उचित समझौता नहीं हो पाया तो उत्तरी आयरलैंड और आयरलैंड गणराज्य के बीच एक सीमा बनानी ही पड़ेगी. ब्रेक्जिट मसौदे में ‘बैकस्टॉप प्रावधान’ इस स्थिति से बचने के लिए ही किया गया है. प्रधानमंत्री टेरेसा मे के मसौदे के अनुसार ब्रिटिश सरकार ट्रांजिशन पीरियड में ईयू के साथ एक व्यापार समझौते पर पहुंचने की कोशिश करेगी जिससे उत्तरी आयरलैंड और आयरलैंड गणराज्य के बीच सीमा बनाने से बचा जा सके.

लेकिन अगर इस अवधि के अंत तक ब्रिटेन और ईयू के बीच कोई व्यापार समझौता नहीं हुआ तो बैकस्टॉप लागू हो जाएगा. इस स्थिति में जहां ब्रिटेन ईयू के कस्टम यूनियन से बंधा रहेगा. वहीं ब्रिटेन का राज्य होते हुए भी उत्तरी आयरलैंड ईयू की एकल प्रणाली से बंध जाएगा और उस स्थिति में वहां ब्रिटेन के नहीं बल्कि ईयू के नियम प्रभावी होंगे. शर्तों के मुताबिक ब्रिटेन ईयू की सहमति के बिना कभी भी ‘बैकस्टॉप प्रावधान’ से अपने राज्य को अलग नहीं करा सकेगा.

सांसदों का विरोध किस बात पर है?

ब्रेक्जिट मसौदे पर बदलाव के बाद भी अगर सांसद इसका विरोध कर रहे हैं, तो उसकी वजह अभी भी बैकस्टॉप का मुद्दा है. दरअसल, ‘बैकस्टॉप प्रावधान’ में ईयू ने किसी तरह का बदलाव नहीं किया है. इसका विरोध कर रहे सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी के सांसदों का कहना कि ईयू बैकस्टॉप पॉलिसी को इसीलिए लाया है क्योंकि वह ब्रिटेन को स्थायी रूप से अपनी कस्टम यूनियन और उसके राज्य उत्तरी आयरलैंड को एकल बाजार प्रणाली में बनाए रखना चाहता है.

इनके मुताबिक अगर ब्रिटेन ट्रांजिशन पीरियड के दौरान कोई व्यापार समझौता नहीं कर सका तो वह ईयू से अलग होकर भी उसके व्यापार से जुड़े नियमों-क़ानूनों से बंधा रहेगा. इस स्थिति में ब्रिटेन न तो आयात होने वाले सामान पर अपने मुताबिक शुल्क लगा सकेगा और न ही अन्य देशों से मुक्त व्यापार समझौते कर सकेगा. टेरेसा मे के ब्रेक्जिट मसौदे का विरोध करने वाले सांसद ‘बैकस्टॉप पॉलिसी’ को ईयू द्वारा बिछाये गए एक जाल की तरह देखते हैं.

विपक्षी लेबर पार्टी का अपना एक अलग विरोध है. लेबर नेताओं का कहना है कि ब्रिटेन को ब्रेक्जिट के बाद भी स्थायी तौर पर ईयू के कस्टम यूनियन में रहना चाहिए. लेकिन, इसके बावजूद उसे अन्य देशों के लिए अपनी व्यापार नीति तय करने का अधिकार हो. साथ ही उत्तरी आयरलैंड और आयरलैंड गणराज्य के बीच कोई सीमा न हो.

यह हफ्ता ब्रेक्जिट के लिए निर्णायक?

ब्रेक्जिट की तारीख़ 29 मार्च है जिस वजह से इसे लेकर न केवल सत्ता पक्ष बल्कि विपक्षी लेबर पार्टी पर भी भारी दबाव है. अगर 29 मार्च तक ईयू और ब्रिटेन के बीच ब्रेक्जिट को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ तो ब्रिटेन बिना किसी समझौते के ईयू से बाहर हो जाएगा. यह स्थिति ब्रिटेन के लिए बेहद खराब मानी जा रही है और ऐसे में दोनों ही पार्टियों को इसके लिए जिम्मेदार माना जाएगा. यही वजह है कि ब्रिटेन की दोनों प्रमुख पार्टियां अब हर हाल में ब्रेक्जिट की प्रक्रिया को आगे बढ़वाने की कोशिश में हैं और इसीलिए इन्होंने बीते हफ्ते संसद में इसे लेकर कानून भी पारित कर दिया.

इसके बाद गुरूवार को टेरेसा मे ने ब्रिटेन के सांसदों से कहा कि अगर वे ब्रेक्जिट प्रक्रिया को तीन महीने के लिए आगे बढ़वाना चाहते हैं तो उनके द्वारा तैयार किए गए ब्रेक्जिट मसौदे को सदन में पारित करें. 21 मार्च को यूरोपीय परिषद का शिखर सम्मेलन हो रहा है जिसमें ब्रेक्जिट प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर विचार किए जाने की उम्मीद है. अब टेरेसा मे की कोशिश है कि 21 मार्च से पहले ब्रिटेन की संसद में ब्रेक्जिट मसौदा पारित करा लिया जिससे यूरोपीय परिषद के शिखर सम्मेलन में इस पर बात कराई जा सके.

ब्रेक्जिट के लिए यह हफ्ता निर्णायक है और इसीलिए टेरेसा मे ने संसद में ब्रेक्जिट मसौदे को पास कराने के लिए एड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिया है. बुधवार को उन्होंने सांसदों को इशारों-इशारों में यह भी बता दिया कि यह अब उनकी आखिरी कोशिश है. उन्होंने कहा, ‘यदि आप मेरे ब्रेक्जिट मसौदे का समर्थन नहीं करते हैं और आप समझौते के साथ ही ईयू से बाहर भी होना चाहते हैं, तो फिर संसद को अपने फैसलों के परिणामों का सामना खुद करने जरूरत है.’