तेलंगाना विधानसभा में कांग्रेस पार्टी की हालत नाज़ुक हो रही है. स्थिति ये बन गई है कि पार्टी सदन में मुख्य विपक्षी दल का दर्ज़ा भी खो सकती है. कांग्रेस विधायक दल के नेता मल्लू भट्‌टी विक्रमार्का से नेता प्रतिपक्ष का दर्ज़ा भी छिन सकता है.

ख़बरों के मुताबिक तेलंगाना विधानसभा में कांग्रेस की यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि बीते एक महीने में उसके आठ विधायक सत्ताधारी टीआरएस (तेलंगाना राष्ट्र समिति) में शामिल हो चुके हैं. इस क्रम में आठवें वी वेंकटेश्वर राव रहे. उन्होंने इसी रविवार को ऐलान किया कि वे टीआरएस में शामिल हो रहे हैं. टीआरएस प्रमुख और प्रदेश के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) से मुलाकात के बाद उन्होंने यह घोषणा की. वी वेंकटेश्वर राव कोठगुडम विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. इसके साथ ही 119 सीटों वाली विधानसभा में टीआरएस की सदस्य संख्या 100 के क़रीब पहुंच गई है. उसने बीते साल दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान 88 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी.

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने 19 सीटें जीती थीं. लेकिन अब उसके पास 11 सदस्य ही बचे हैं. इसीलिए उसके मुख्य विपक्षी पार्टी बने रहने पर भी संदेह पैदा हो गया है. नियमों के मुताबिक मुख्य विपक्षी दल (जिसके नेता को नेता प्रतिपक्ष का दर्ज़ा दिया जाता है) के पास सदन में कुल सदस्य संख्या के लगभग 10 फ़ीसदी सदस्य होने चाहिए. इस तरह कांग्रेस के लिए यह सदस्य संख्या 12 होती है. फिलहाल इतने सदस्य कांग्रेस के पास अब नहीं बचे हैं. इसीलिए ऐसी आशंका जताई जा रही है कि कांग्रेस नेता विकमार्का से नेता प्रतिपक्ष का दर्ज़ा छिन सकता है. इस हैसियत से उन्हें कैबिनेट मंत्री के बराबर सुविधाएं दी जा रही हैं. वे तमाम सुविधाएं भी उनसे वापस ली जा सकती हैं.