सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष को भारत का पहला लोकपाल नियुक्त किया गया है. खबरों के मुताबिक मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनके नाम पर मुहर लगाई. उनके साथ ही राष्ट्रपति ने जस्टिस दिलीप बी भोंसले, जस्टिस पीके मोहंती, जस्टिस अभिलाषा कुमारी और जस्टिस एके त्रिपाठी को लोकपाल के न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया. इसके अलावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की पूर्व प्रमुख अर्चना रामसुंदरम और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन की नियुक्ति लोकपाल के गैर न्यायिक सदस्यों के तौर पर की गई है.

जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष मार्च 2013 में सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किए गए थे. वहां मई 2017 तक उनका कार्यकाल रहा था. लोकपाल के तौर पर नियुक्ति से पहले वे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य के तौर पर काम कर रहे थे. जस्टिस घोष उस वक्त चर्चा में आए थे जब उन्होंने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की करीबी मानी जाने वाली शशिकला को आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी ठहराया था.

इससे पहले बीते शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लोकपाल के लिए उच्च स्तरीय चयन समिति की बैठक हुई थी. उस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पिनाकी चंद्र घोष को लोकपाल नियुक्त किए जाने को लेकर सहमति जताई थी.