कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा द्वारा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को कथित तौर पर करोड़ों रुपये दिए जाने के मामले में कांग्रेस ने लोकपाल से जांच की मांग की है. कांग्रेस ने यह मांग अंग्रेजी की पत्रिका द कारवां की एक रिपोर्ट के आधार पर उठाई है. इस रिपोर्ट में आयकर विभाग के पास अगस्त, 2017 से मौजूद एक डायरी के आधार पर यह दावा किया गया है कि येद्दियुरप्पा ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, जजों और वकीलों को करीब 1800 करोड़ रुपये दिए थे.

यह डायरी 2009 की है और इसमें कन्नड़ भाषा में इस भुगतान का विवरण दर्ज है. कारवां की रिपोर्ट में इस डायरी की फोटोकॉपी प्रकाशित हुई है और दावा किया गया है कि यह विवरण खुद येद्दियुरप्पा की हस्तलिपि में है. साथ ही इसमें उनके हस्ताक्षर भी हैं. हालांकि यह साफ नहीं है कि करोड़ों रुपये का यह भुगतान किन तारीखों को किया गया. येद्दियुरप्पा 2008 से 2011 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे.

कारवां में यह रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद शुक्रवार को कांग्रेस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है. इसमें पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है, ‘अगर इस डायरी में सच्चाई नहीं है कि तो नरेंद्र मोदी जांच के लिए तैयार क्यों नहीं हैं? अब तो लोकपाल की भी नियुक्ति हो गई है. क्या पहली स्वतंत्र जांच इसी मामले में नहीं होनी चाहिए?’

डायरी के विवरण में क्या है

डायरी में दर्ज विवरण के मुताबिक येद्दियुरप्पा ने भाजपा की केंद्रीय समिति को 1000 करोड़ रुपये दिए थे. इसके अलावा अरुण जेटली और नितिन गडकरी को 150-150 करोड़, राजनाथ सिंह को 100 करोड़, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को 50-50 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था.

इस विवरण के मुताबिक भाजपा नेता ने 10 करोड़ रुपये ‘गडकरी के बेटे की शादी’ के लिए और 250 करोड़ रुपये ‘जजों’ और 50 करोड़ रुपये ‘वकीलों (केस लड़ने की फीस)’ को दिए थे.

कारवां की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर कहा था कि इस मामले में आगे जांच की जा सकती है लेकिन केंद्रीय मंत्री ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की. कारवां ने अपनी रिपोर्ट को लेकर सभी संबंधित मंत्रियों और नेताओं से बात करने की कोशिश की थी लेकिन रिपोर्ट के साथ किसी की प्रतिक्रिया प्रकाशित नहीं हुई है.

डायरी के विवरणों के मुताबिक कर्नाटक के आठ विधायकों को भी करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया था. इनमें से कुछ ने 2008 में येद्दियुरप्पा को सरकार बनाने में मदद की थी और बाद में इन्हें मंत्री पद भी मिला था. सात विधायकों में से हर एक को कथित तौर पर 20 करोड़ और एक विधायक को 10 करोड़ रुपये मिले थे. यह भुगतान खनन कारोबारी जी जनार्दन रेड्डी ने किया था. रेड्डी इस समय पोंजी स्कीम मामले में जमानत पर जेल से बाहर हैं.

डायरी के विवरणों से यह भी पता चलता है कि 26 लोगों ने येद्दियुरप्पा को कुल 2,690 करोड़ रुपये दिए थे. आयकर विभाग ने 2017 में कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार के घर पर छापा मारा था और कारवां की रिपोर्ट के मुताबिक उसे यह डायरी इस कार्रवाई के दौरान मिली थी.

वहीं बीएस येद्दियुरप्पा ने अपने ऊपर लगे इन आरोपों को खारिज किया है. भाजपा नेता ने कहा है, ‘मैं इस मामले में मानहानि का दावा करने के बारे में सोच रहा हूं... ये झूठे आरोप हैं. आयकर विभाग के अधिकारियों ने भी जांच की थी और पाया था कि दस्तावेज और उन पर मेरे दस्तखत फर्जी हैं... यह सब राजनीति से प्रेरित है.’