जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक के संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्र सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया है. खबरों के मुताबिक शुक्रवार को यह फैसला इस संगठन की गतिविधियों के आधार पर किया गया. जेकेएलएफ पर यह प्रतिबंध आतंकवाद निरोधक कानून की धारा तीन के तहत लगाया गया है. इधर, यासीन मलिक को पहले ही लोक सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया जा चुका है. पिछले महीने की 22 तारीख से उन्हें जम्मू की कोट बलवल जेल में रखा गया है.

इधर, सरकार के इस फैसले पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए गृह सचिव राजीव गाबा ने कहा, ‘जेकेएलएफ को गैर कानूनी गतिविधियों में संलिप्त पाया गया है. उसी के अधार पर यह कार्रवाई की गई है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘घाटी में यह संगठन अलगाववादी विचारधारा फैलाने का अगुवा रहा है. साथ ही 1988 के बाद से यह कई हिंसक गतिविधियों में भी शामिल रहा है. ऐसे में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति भी इस संगठन के खिलाफ इस कार्रवाई की एक वजह है.’

जमात-ए-इस्लामी के बाद जेकेएलएफ जम्मू-कश्मीर का दूसरा संगठन है जिसे सरकार ने इसी महीने में प्रतिबंधित किया है. इससे पहले उस संगठन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सरकार ने उसकी अनेक संपत्तियों को जब्त कर लिया था. साथ ही उसके नेताओं को भी हिरासत में ले लिया गया था.

इस बीच इस फैसले को लेकर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने एक ट्वीट के जरिये सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है, ‘जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को सुलझाने के लिए यासीन मलिक पहले ही हिंसा का रास्ता छोड़ चुका है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी मलिक को बातचीत की प्र​क्रिया में साझेदार बनाया था.’ इसके साथ ही सवालिया लहजे में उन्होंने यह भी कहा है, ‘इस संगठन पर प्रतिबंध लगाकर सरकार को क्या हासिल होगा. ऐसे फैसलों से तो सरकार कश्मीर को खुली जेल में तब्दील कर देगी.’