वित्तीय दिक्कतों से जूझ रही जेट एयरवेज की उड़ाने लगातार रद्द हो रही हैं और उसके बेड़े के जहाजों का एक बड़ा हिस्सा पार्किंग में खड़ा किया जा चुका है. जेट की उड़ानें रद्द होने से उन लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने महीने पहले अपने टिकट बुक कराए थे. नए हालात में उन्हें नई उड़ानों में टिकट कराने पड़ रहे हैं जो पहले की बुकिंग के मुकाबले अब काफी महंगी हो चुकी हैं. इसके अलावा जेट एयरवेज पर आरोप है कि अनिश्चय की स्थिति के बावजूद, वह टिकट कैंसिल कराने पर फीस के नाम पर मोटी रकम वसूल रही है.

टाइम्स आफ इंडिया के मुताबिक, जेट एयरवेज के एकाएक अपनी उड़ाने रद्द करने से परेशान यात्री अपना टिकट रद्द करा रहे हैं तो उनसे टिकट कैंसिल कराने के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है. कई बार यह प्रति टिकट 4500 रुपये से अधिक है.पिछले महीने ही जेट एयरवेज ने अपनी कैंसिलेशन फीस में बढोत्तरी भी की थी. यात्रियों का कहना है कि 72 घंटे पहले तक यह जानकारी नहीं दी जा रही है कि फ्लाइट जाएगी या नहीं. जरुरी यात्रा होने के चलते लोग अगर असमंजस में टिकट कैंसिल कराते हैं तो कंपनी उसे स्वेच्छा से कैंसिल कराया गया टिकट मानती है और मोटा कैंसिलेशन चार्ज लगाती है.

इस बारे में जेट एयरवेज का कहना है कि स्वेच्छा से टिकट कैंसिल कराने पर उतना ही पैसा काटा जा रहा है, जितने का नियम है. लेकिन यात्रियों का कहना है कि जेट की अनियमित उड़ानों को देखते हुए इसे स्वेच्छा से टिकट कैंसिल कराना नहीं कहा जा सकता. लोग इस डर से टिकट कैंसिल करा रहे हैं कि हो सकता है उस दिन फ्लाइट रद करने की घोषणा कर दी जाएं.

ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन आफ इंडिया का कहना है कि इस तरह की असुविधा से बचने के लिए डीजीसीए को जेट एयरेवज को निर्देश देना चाहिए कि वह अपना दो माह का संशोधित शेड्यलू पेश करे. एयर पैसेंजर्स एसोशिएसन का कहना है कि जब एयरलाइंस अपनी उड़ानों के समय और उनके रद्द होने में कोई अनुशासन नहीं रख पा रही है तो वह भ्रम की स्थित में टिकट कैंसिल कराने को स्वेच्छा से टिकट कैंसिल कराना कैसे कह सकती है. ऐसी स्थिति में उसे या तो उड़ान के सुनिश्चित होने का भरोसा दिलाना चाहिए या पूरा किराया वापस करना चाहिए.