शराब कारोबारी विजय माल्या भले अपनी किंगफिशर एयरलाइंस को दिवालिया होने और बंद हो जाने से न बचा पाए हों मगर वे जेट एयरवेज़ को बचाना चाहते हैं. उन्होंने भारतीय बैंकों से पेशकश की है, ‘चाहे तो मेरे पैसे ले लीजिए, लेकिन जेट एयरवेज़ को बचाइए.’ उन्होंने इस पर खुशी भी जताई कि कंगाल हो चुकी जेट एयरवेज़ को बचाने के लिए भारतीय बैंक आगे आए हैं.
भारतीय बैंकों का 9,000 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज़ चुकाए बिना भारत छोड़कर लंदन में जा बसे विजय माल्या ने जेट एयरवेज़ से जुड़े घटनाक्रम के बाद ट्वीट किया, ‘सरकारी क्षेत्र के बैंक जेट एयरवेज़ को बचाने, उससे संबंधित रोज़गार को सुरक्षित रखने, उद्योग और हवाई संपर्क की स्थिति को दुरुस्त रखने के लिए आगे आए हैं. यह खुशी की बात है. मेरी इच्छा थी कि यह क़दम किंगफिशर एयरलाइंस के मामले में भी उठाया जाना चाहिए था.’
भारत में भगोड़े आर्थिक अपराधी करार दिए गए विजय माल्या ने आगे लिखा, ‘मैंने कर्नाटक हाईकोर्ट के सामने जो पेशकश की थी उसे मैं फिर दोहराता हूं. मेरी पूरी चल संपत्ति से मैं सरकारी बैंकों और सभी कर्ज़दारों का पूरा पैसा लौटाने को तैयार हूं. बैंक मेरा पैसा क्यों नहीं ले रहे हैं? इससे ज़्यादा कुछ नहीं तो जेट एयरवेज़ को बचाने में ही थोड़ी मदद मिल जाएगी.’ ग़ौरतलब है कि इसी सोमवार को जेट एयरवेज़ के संस्थापक नरेश गोयल और उनकी पत्नी अनीता ने कंपनी से इस्तीफ़ा दिया है.
जेट एयरवेज़ को कर्ज़ देने वाले बैंकों के दबाव में नरेश और अनीता गोयल को कंपनी में हिस्सेदारी छोड़नी पड़ी. कर्ज़दाता बैंकों ने जेट एयरवेज़ की वित्तीय हालत बेहतर कर पाने जब गोयल को सक्षम नहीं पाया तो उन्होंने उनसे कंपनी छोड़ने को कहा था. अब नरेश गोयल और उनकी पत्नी की जेट एयरवेज़ में 51 फ़ीसदी हिस्सेदारी के मालिक कर्ज़दाता सरकारी बैंक हैं. ख़बरों की मानें तो वे अपने हिसाब से इस कंपनी को घाटे से उबारने की कोशिश कर रहे हैं.
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