चीन में 28 हजार से ज्यादा ऐसे नक्शों को नष्ट किए जाने की खबर है जिनमें अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा दिखाया गया था. साथ ही इन नक्शों में ताइवान को भी एक अलग देश के तौर पर पेश किया गया था. खबरों के मुताबिक इन नक्शों को पूर्वी चीन के अनहुई में स्थित एक कंपनी ने निर्यात के उद्देश्य से छापा था. लेकिन नक्शों को बाहर भेजे जाने से पहले ही शानडोंग प्रांत के कस्टम अधिकारियों ने उस कंपनी पर छापा मारा. साथ ही ऐसे 28,908 नक्शों की 803 पेटियां जब्त कर लीं.

बताया जाता है कि इसके बाद उन नक्शों को किसी गुप्त स्थान पर ले जाया गया और उनके टुकड़े करके उन्हें नष्ट कर दिया गया. इस दौरान शानडोंग प्रांत के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने उन्हें नष्ट किए जाने की ​पुष्टि की है. साथ ही यह भी कहा है कि नक्शे किसी भी देश की संप्रभुता और राजनीतिक विवरण का प्रतिबिंब होते हैं. ऐसे में ‘क्षेत्रीय अखंडता’ को ध्यान में रखते हुए यह कार्रवाई की गई है. मंत्रालय ने यह भी कहा है कि हाल के वर्षों में ‘गलत नक्शों’ को नष्ट किए जाने संबंधी यह एक बड़ी कार्रवाई थी.

इस बीच चीन के विदेश मामलों के एक विशेषज्ञ लियू वेन्जोंग ने ‘गलत नक्शों’ को नष्ट किए जाने को सही कदम ठहराया है. उनका कहना है, ‘किसी भी देश के लिए संभप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता सबसे महत्वपूर्ण चीज होती है. ताइवान और दक्षिण तिब्बत (अरुणाचल प्रदेश) चीन का हिस्सा हैं. अगर गलत नक्शे देश या फिर विदेश में प्रसारित होते हैं तो इससे चीन की क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचेगा.’

गौरतलब है कि ताइवान के अलग होने के बाद भी चीन उसे अपना ही हिस्सा बताता है. इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत में स्थित अरुणाचल प्रदेश पर भी वह कई वर्षों से अपना दावा ठोकता रहा है. साथ ही वह भारत के बड़े नेताओं के अरुणाचल दौरे पर विरोध जाहिर करता है. बीते साल फरवरी में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां का दौरा किया तो उस वक्त भी चीन ने कुछ वैसी ही प्रतिक्रिया जाहिर की थी.