भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारत के सात प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर के आंकड़े पर संदेह जताया है. उन्होंने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों को लेकर उपजे संदेह को दूर करने के लिए एक निष्पक्ष समूह की नियुक्ति किए जाने की बात भी कही.

रघुराम राजन ने एक टीवी चैनल से साक्षात्कार में कहा, ‘जब देश में नौकरियों का सृजन नहीं हो रहा है, तब सात प्रतिशत की वृद्धि दर का आंकड़ा संदेह के घेरे में आ जाता है, संदेह के इन बादलों को दूर किया जाना चाहिए.’ राजन के मुताबिक उन्हें यह नहीं पता है कि मौजूदा सांख्यिकी आंकड़े किस ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन देश की सही वृद्धि दर का पता लगाने के लिए इन्हें ठीक किये जाने की जरूरत है. उन्होंने आगे कहा, ‘मैं नरेंद्र मोदी सरकार में एक मंत्री को जानता हूं, जिन्होंने कहा था कि नौकरियां नहीं हैं तो हम कैसे सात प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल कर रहे हैं.’ हालांकि, राजन ने मंत्री के नाम का खुलासा नहीं किया.

नवंबर, 2018 में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने पूर्ववर्ती कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल के दौरान के वृद्धि दर के आंकड़ों को घटा दिया था. इस बात को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि सरकार एनएसएसओ के श्रम संबंधी सर्वे के आंकड़े जारी नहीं कर रही है, जिसमें कथित तौर पर 2017 में बेरोजगारी की दर 45 साल के उच्चस्तर पर पहुंच चुकी है. लेकिन वित्त मंत्री अरूण जेटली मजबूत तरीके से वृद्धि दर के आंकड़ों का बचाव कर रहे हैं. उनका कहना है कि बिना रोजगार सृजन के अर्थव्यवस्था सात से आठ प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल नहीं कर सकती.