प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार सुबह 11 बजे जो ट्वीट किया था, उसके बाद पूरे देश में हलचल सी मच गई थी. इस ट्वीट में नरेंद्र मोदी ने कहा कि वे देश को एक महत्वपूर्ण संदेश देने वाले हैं. थोड़ी देर बाद देश को दिए संबोधन में उन्होंने बताया कि भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन को अंजाम दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘मिशन शक्ति’ के तहत वैज्ञानिकों ने लो अर्थ ऑर्बिट में एक लक्षित सैटेलाइट को सफलतापूर्वक मार गिराया. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस मिशन के बाद भारत अंतरिक्ष शक्ति वाले देशों (अमेरिका, रूस और चीन) की फ़ेहरिस्त में शामिल हो गया.

लेकिन प्रधानमंत्री का यह दावा दो कारणों से सवालों के घेरे में है. जानकार कह रहे हैं कि जिस तकनीकी क्षमता की बात नरेंद्र मोदी ने की वह भारत के पास पहले से है. वहीं, लोकसभा चुनाव के चलते पूरे देश में लागू आचार संहिता के बीच देश के सबसे चर्चित नेता का इस तरह संबोधन देना भी सवाल करने की वजह बन गया है. विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से शिकायत कर कहा है कि इस तरह के अभियानों की जानकारी वैज्ञानिक संस्था द्वारा दी जाती है. माकपा ने पूछा कि इस उपलब्धि का ‘राजनीतिक लाभ’ लेने की अनुमति प्रधानमंत्री को क्यों मिल गई. ख़बर है कि विपक्षी दलों की शिकायत पर चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री के संबोधन पर संज्ञान लिया है.

वहीं, पुरानी रिपोर्टों से जुड़े तथ्य भी प्रधानमंत्री के संबोधन पर सवाल उठाते हैं. दरअसल, सात साल पहले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने घोषणा की थी कि भारत इस तरह की तकनीक में सक्षम हो गया है. ऐसे में देश के सबसे महत्वपूर्ण चुनावों के बीच इस तरह देश के नाम संबोधन करना सवाल खड़े करता है. सीपीआईएमएल नेता प्रभात कुमार ने कहा है, ‘मोदी सरकार ने यही समय क्यों चुना? साफ़ है कि भाजपा चुनाव में अपनी हार के डर से चिंतित है इसलिए उसने युद्ध का ख़तरा दिखाते हुए डीआरडीओ की रक्षा क्षमता का इस्तेमाल चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने के लिए किया.’

उधर, कई जानकार प्रधानमंत्री के संबोधन को कांग्रेस की ‘न्याय’ योजना से भी जोड़कर देख रहे हैं. एक दिन पहले की ही बात है जब तमाम न्यूज़ चैनलों, अख़बारों और सोशल मीडिया पर कांग्रेस का ‘न्याय’ प्रस्ताव चर्चा का विषय बना हुआ था. एक बड़ा वर्ग जहां इस योजना को लेकर कांग्रेस की आलोचना कर रहा था, वहीं, दूसरी तरफ़ कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि न्यूनतम आय गारंटी योजना (न्याय) का लागू होना संभव है. यह बात कांग्रेस के पक्ष में जा रही थी. आलोचना और संभावना की चर्चा के चलते कांग्रेस पार्टी और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी बहस का विषय बन गए थे.

लेकिन प्रधानमंत्री ने इस बहस को बदल दिया. पहले उन्होंने नोटबंदी की घोषणा की तर्ज़ पर पूरे देश को अलर्ट कर दिया. फिर मिशन शक्ति के बारे में बताकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया. जबकि संबोधन में जो उन्होंने कहा, वह तथ्यात्मक रूप से बहुत हैरान करने वाला नहीं था. उन्होंने भारत के पास पहले से मौजूद तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल की जानकारी साझाकर कांग्रेस और उसकी ‘न्याय’ योजना को राष्ट्रीय बहस के दायरे से बाहर कर दिया. उनके संबोधन की आलोचना भी हो रही है और प्रशंसा भी. डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख वीके सारस्वत और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर ने भी प्रधानमंत्री की तारीफ़ की है. और साफ़ दिख रहा है कि अब आलोचना और प्रशंसा की बहस का केंद्र फिर से नरेंद्र मोदी हैं.