ब्रिटेन की एक अदालत ने पीएनबी घोटाले के मुख्‍य आरोपी नीरव मोदी को जमानत देने से इंकार कर दिया है. शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह मानने के पर्याप्त साक्ष्य हैं कि नीरव मोदी आत्मसमर्पण नहीं करेगा, इसलिए उसे अभी जमानत नहीं दी जा सकती.

शुक्रवार को 48 वर्षीय नीरव मोदी दूसरी बार जमानत की याचिका लेकर वेस्टमिंस्टर की मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष पेश हुआ. पीटीआई के मुताबिक भारतीय प्राधिकरण की ओर से दलील पेश करते हुए क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने कहा कि नीरव मोदी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि उसके भागने की आशंकाएं हैं.

सीपीएस बैरिस्टर टोबी कैडमैन ने जज से कहा कि इस बात की काफी संभावना है कि पंजाब नेशनल बैंक घोटाले का प्रमुख अभियुक्त भाग सकता है और सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है. नीरव मोदी द्वारा सबूतों से छेड़छाड़ का उदाहरण देते हुए सीपीएस बैरिस्टर ने बताया कि एक गवाह आशीष लाड को उसने फोन पर जान से मारने की धमकी दी और झूठी गवाही देने पर 20 लाख रुपये देने की पेशकश की.

पीटीआई के मुताबिक बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद मुख्य मजिस्ट्रेट एम्मा अर्बथनॉट ने कहा, ‘नीरव मोदी द्वारा वानूआतू की नागरिकता हासिल करने का प्रयास यह दर्शाता है कि वह महत्वपूर्ण समय के दौरान भारत से दूर जाना चाहता है. अगर आरोपी को जमानत मिली तो वह आत्मसमर्पण नहीं करेगा.’ अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रैल को तय की है.