शुक्रवार को ब्रिटेन के सांसदों ने तीसरी बार प्रधानमंत्री टेरेसा मे के ब्रेक्जिट समझौते को नकार दिया. ब्रिटिश संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ ने 286 के बदले 344 मतों से समझौते को खारिज किया है. ब्रिटेन के लिए यह तीसरा मतदान बेहद अहम था. दरअसल, बीते हफ्ते यूरोपीय संघ (ईयू) कुछ शर्तों के साथ ब्रेक्जिट के लिए ब्रिटेन को 29 मार्च की जगह 22 मई तक का समय देने पर सहमत हुआ था. शर्त के अनुसार ब्रिटेन की सरकार को तीसरी बार में ब्रेक्जिट समझौता अपनी संसद से पारित कराना जरूरी था. ईयू का कहना था कि अगर समझौता तीसरी बार भी पास नहीं हो पाया तो ब्रिटेन को 12 अप्रैल तक यूरोपीय संघ को अपने आगे के निर्णय के बारे में बताना होगा.

इन शर्तों के बारे में बताते हुए यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क का साफ़ कहना था कि ब्रिटेन के पास अब भी चार विकल्प हैं. उसके पास समझौते के साथ बाहर होने, समझौते के बिना बाहर होने, दीर्घकालिक विस्तार या फिर यूरोपीय संघ से अलग नहीं होने का फैसला करने का भी विकल्प है.

जाहिर है कि शुक्रवार को तीसरी बार ब्रेक्जिट समझौता पास न होने के साथ ही ब्रिटेन को मिली 22 मई तक की मोहलत खत्म हो गई. अब ब्रिटेन के पास 12 अप्रैल तक का समय है. अगर वह तब तक कोई निर्णय नहीं ले सका तो बिना किसी समझौते के इस तारीख को ईयू से बाहर हो जाएगा. ब्रिटेन और ईयू दोनों ही यह स्थिति नहीं चाहते. इस स्थिति से बचने के लिए ब्रिटेन को 12 अप्रैल तक यूरोपीय संघ से ब्रेक्जिट प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अपील करने पड़ेगी. अगर वह ब्रेक्जिट प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अपील करता है तो यूरोपीय संघ ब्रेक्जिट प्रक्रिया को एक लंबे समय (दो साल से ज्यादा) के लिए आगे बढ़ा देगा. ब्रिटेन के सांसद और ब्रेक्जिट समर्थक नागरिक इतना लंबा विस्तार भी नहीं चाहते.

यानी कुल मिलाकर देखा जाए तो ब्रेक्जिट को लेकर एक ऐसी स्थिति बन गयी है जिसमें हर कोई एक ही सवाल पूछ रहा है कि आखिर ब्रेक्जिट पर अब आगे क्या होगा? ब्रेक्जिट को लेकर अब अगला हफ्ता काफी महत्वपूर्ण हो गया है. ब्रिटेन की संसद इस दौरान कोई ऐसा रास्ता निकालने की भी कोशिश में है जिससे ‘नो डील ब्रेक्जिट’ और ‘दीर्घकालिक विस्तार’ दोनों से ही बचा जा सके. आइये जानते हैं कि अगले हफ्ते संसद में क्या कुछ होने वाला है और इससे ब्रिटेन के किस राह पर जाने का संकेत मिलता है.

विकल्पों पर फिर मतदान

बीते हफ्ते ब्रिटेन के सांसदों ने ब्रेक्जिट प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाने के लिए मतदान किया था जिससे उन्हें ब्रेक्जिट के विभिन्न विकल्पों के लिए अपनी प्राथमिकता जाहिर करने का अधिकार मिल गया. इसके बाद सांसदों ने आठ विकल्पों पर मतदान किया. इनमें समझौते के बिना यूरोपीय संघ छोड़ना, ईयू के सीमा शुल्क संघ एवं एकल बाजार में बने रहना, दूसरा जनमत संग्रह कराना और बिना किसी समझौते के ईयू से अलग होने की संभावना दिखने पर ब्रेक्जिट को रद्द करना शामिल था.

लेकिन बीते हफ्ते संसद में इनमें से किसी विकल्प को बहुमत नहीं मिला. इसके बाद सांसदों ने यह तय किया कि वे विकल्पों की संख्या कम करके एक अप्रैल को संसद में इन पर फिर चर्चा करेंगे और तीन अप्रैल को फिर से विकल्पों पर मतदान करवाएंगे.

किसी विकल्प को बहुमत मिलने के बाद क्या होगा?

अमेरिकी न्यूज़ चैनल सीएनएन के वरिष्ठ पत्रकार रॉब पिचेटा के अनुसार अगर बुधवार को ब्रिटेन की संसद सांसदों द्वारा सुझाए गए किसी विकल्प को बहुमत के साथ पास कर देती है तो इसके बाद सरकार की प्रमुख यानी प्रधानमंत्री टेरेसा मे संसद को अपनी ब्रेक्जिट डील और सांसदों के विकल्प में से किसी एक को चुनने को कह सकती हैं. रॉब पिचेटा कहते हैं कि या फिर टेरेसा मे ऐसा न करके केवल सांसदों द्वारा पास किए गए विकल्प पर भी सहमत हो सकती हैं.

शुक्रवार को टेरेसा मे ने ऐसे संकेत भी दिए थे. उन्होंने तीसरी बार अपना समझौता खारिज होने के बाद कहा था, ‘हमें जल्द ही किसी वैकल्पिक तरीके पर सहमत होना होगा.’ सांसदों को चेताते हुए उनका आगे कहना था, ‘ध्यान रहे कि यूरोपीय संघ स्पष्ट कर चुका है कि अगर ब्रिटेन को और विस्तार चाहिए तो उसे एक स्पष्ट योजना या विकल्प देना होगा और 12 अप्रैल से पहले ईयू के 27 सदस्य देशों को भी उस विकल्प पर सहमत होना जरूरी होगा.’

शुक्रवार को यूरोपीय संघ के एक प्रमुख सदस्य देश फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी चेतावनी देते हुए कहा था, ‘अब ईयू ब्रिटेन की ब्रेक्जिट को आगे बढ़ाने की अपील यूं ही नहीं मान लेगा. इस पर केवल तभी विचार किया जाएगा जब वैकल्पिक योजना बेहतर और विश्वसनीय हो, साथ ही ब्रिटिश संसद उसे बहुमत से पास करे.’

क्या ब्रिटेन बिना किसी समझौते के भी ईयू से बाहर हो सकता है?

ब्रेक्जिट मामले पर नजर रख रहे कई जानकार ‘नो डील ब्रेक्जिट’ की भी प्रबल संभावना बताते हैं. इनके मुताबिक अगर ब्रिटेन के सांसद 12 अप्रैल तक किसी विकल्प पर सहमत नहीं होते और दीर्घकालिक विस्तार के लिए भी तैयार नहीं होते तब ब्रिटेन का बिना किसी समझौते के ईयू से बाहर होना तय है.

ब्रिटेन की कंपनियों और ईयू सदस्य देशों ने ‘नो डील ब्रेक्जिट’ की स्थिति से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है. ब्रिटेन के सीमाई देश आयरलैंड गणराज्य के प्रधानमंत्री लियो वरादकर ने कहा है, ‘आयरलैंड ने ‘नो डील ब्रेक्जिट’ की स्थिति से निपटने की गंभीरता पूर्वक तैयारी शुरू कर दी है.’

उनका आगे कहना था, ‘ब्रिटेन सहित सभी ईयू सदस्य देशों को समझना चाहिए कि ‘नो डील ब्रेक्जिट’ कितनी बड़ी समस्या खड़ी करने वाला है. जो कुछ हो रहा है उससे लगता है कि ब्रिटेन अभी भी यह नहीं समझ पाया है कि वह ‘नो डील ब्रेक्जिट’ के मुहाने पर खड़ा है.’ यूरोपीय परिषद ने भी शुक्रवार रात अपने बयान में कहा है कि जैसे हालात दिख रहे हैं उससे ‘नो डील ब्रेक्जिट’ की संभावना ही नजर आ रही है.