भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-कानपुर की सीनेट ने एक दलित शिक्षक सुब्रमण्यम सद्रेला का पीएचडी के लिए जमा कराया निबंध (थीसिस) रद्द करने की सिफारिश की है. सुब्रमण्यम ने पिछले साल अपने चार सहयोगियों पर भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. अब सीनेट ने कथित रूप से ‘साहित्यिक-चोरी’ के आरोप के आधार पर शिक्षक की थीसिस पर रोक लगाने की सिफारिश की है. हालांकि इस मामले में संस्थान के एकेडमिक एथिक्स सेल ने अपनी जांच में न तो दलित शिक्षक दोषी को पाया था और न ही इस तरह की कार्रवाई की बात कही थी.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक पिछले साल 15 अक्टूबर को आईआईटी-कानपुर के शिक्षकों को सुब्रमण्यम की थीसिस को लेकर एक अंजान ईमेल मिला था. इसमें उन पर किसी और की थीसिस चुराने का आरोप लगाया गया था. वहीं, इस बीच हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज ने भेदभाव वाले मामले में दो महीने की जांच के बाद चारों आरोपित शिक्षकों को संस्थान के नियमों और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के उल्लंघन का दोषी पाया. उससे पहले संस्थान द्वारा गठित तीन सदस्य जांच समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में आरोपित शिक्षकों को दोषी बताया था.

लेकिन अब सुब्रमण्यम सद्रेला पर ही कार्रवाई होने की संभावना है. खबर के मुताबिक आईआईटी-कानपुर के निदेशक के नेतृत्व वाली सीनेट दलित शिक्षक के खिलाफ अपनी सिफारिश जल्दी ही शासक मंडल के सामने रखेगी. अगर वहां सिफारिश को मंजूरी मिल गई तो सुब्रमण्यम की पीएचडी डिग्री वापस ले ली जाएगी. इससे उन्हें अपनी नौकरी भी गंवानी पड़ सकती है. हैदराबाद स्थित जवाहरलाल नेहरू तकनीकी विश्वविद्यालय से एयरनॉटिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने वाले सुब्रमण्यम ने आईआईटी-कानपुर से एमटेक और पीएचटी की पढ़ाई की थी.