भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता और लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार संबित पात्रा के एक वीडियो ने लोगों को नरेंद्र मोदी सरकार की उज्जवला योजना पर सवाल खड़ा करने का मौका दे दिया है. इस वीडियो में ओडिशा के पुरी से उम्मीदवार संबित पात्रा को एक गरीब परिवार के घर में खाना खाते देखा जा सकता है. लेकिन वीडियो में परिवार की एक महिला आम गैस पर नहीं, बल्कि मिट्टी के चूल्हे के पास काम करती दिख रही है.

संबित ने अपने ट्विटर हैंडल से यह वीडियो शेयर किया है. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक इसमें उन्होंने उड़िया भाषा में लिखा है, ‘यह मेरा घर है. मेरी मां ने मुझे खुद से बनाया खाना खिलाया. मैंने भी उसे अपने हाथ से खाना खिलाया. मैं जानता हूं कि मानवता की सेवा भगवान की सबसे बड़ी सेवा है.’

संबित पात्रा के इस ट्वीट के बाद लोगों ने मोदी सरकार के उस दावे पर सवाल उठाना शुरू कर दिया जिसमें उसने कहा था कि उज्जवला योजना के तहत देश के सात करोड़ घरों में गैस कनेक्शन मुहैया कराया गया है. हालांकि सरकार की यह योजना दो वजहों से आलोचना के घेरे में हैं. पहली यह कि एलपीजी सिलेंडर की कीमत 800 रुपये है जिसका भुगतान गरीबी रेखा से नीचे के लोग नहीं कर सकते. दूसरी वजह यह कि सरकार ने अपनी वेबसाइट पर रसोई गैस कनेक्शन दिए जाने की जानकारी दी है, लेकिन सिलेंडरों की रीफिलिंग (दोबारा भराई) से जुड़ा कोई डेटा वहां उपलब्ध नहीं है.