पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा है कि न्यूनतम आय गारंटी से जुड़ी उनकी पार्टी की ‘न्याय’ योजना मध्यम वर्ग के लोगों को प्रभावित नहीं करेगी. इस योजना को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि इसके लिए खर्च होने वाली रकम मध्यम वर्ग से कर के रूप में वसूली जाएगी. पी चिदंबरम ने इस तरह के कयासों को खारिज किया है. एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने दावा किया, ‘मैं बेहतर कर व्यवस्था के साथ अपनी और पार्टी की तरफ से वादा करता हूं कि मध्यम वर्ग पर कर का बोझ नहीं पड़ेगा.’

चिदंबरम से सवाल किया गया कि उनकी पार्टी इस योजना के लिए संसाधन कैसे जुटाएगी. इस पर एनडीए सरकार को निशाने पर लेते हुए चिदंबरम ने कहा, ‘भारत सरकार के संसाधन इतनी तेजी से नहीं बढ़ते जितने कुछ विशेष व्यक्तियों के बढ़ते हैं. यानी संसाधन बढ़ाने के रास्ते हैं. दूसरी बात, सामाजिक-आर्थिक उद्देश्य के लिए दी गई सब्सिडी को छुए बिना भी ऐसा करने की काफी संभावना है. मैं यह फिर दोहरा दूं, कि किसी विशेष सामाजिक-आर्थिक उद्देश्य के लिए दी गई सब्सिडी में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. हम (न्याय) योजना के लिए राजकोषीय विस्तार करेंगे.’

गौरतलब है कि बीती 25 मार्च को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश के 20 प्रतिशत सबसे गरीब लोगों के लिए ‘न्याय’ योजना की घोषणा की थी. इसके तहत ऐसे परिवारों को प्रतिवर्ष 72,000 या प्रतिमाह 6,000 रुपये बतौर मदद दिए जाएंगे. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था कि उनकी पार्टी की सरकार बनने पर यह योजना ‘गरीबी खत्म करने के लिए’ लाई जाएगी. वहीं, न्याय को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब में कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि यह योजना एनडीए सरकार की नोटबंदी और जीएसटी की तरह लागू नहीं की जाएगी. पार्टी ने उन दावों को भी खारिज किया जिनके मुताबिक न्याय की वजह से देश का वार्षिक राजकोषीय घाटा तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाएगा.