भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नए वित्तीय वर्ष की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में आम लोगों को राहत दी है. उसने अपनी ओर से रेपो रेट में 25 बेस पॉइंट की कटौती कर दी है. आरबीआई के इस कदम से रेपो दर 6.25 प्रतिशत से घट कर छह प्रतिशत हो गई है. इससे पहले फरवरी में भी आरबीआई ने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी. कहा जा रहा है कि लगातार दूसरी बार ब्याज दर में कटौती से कर्ज लेने वालों को बड़ी राहत मिल सकती है.

पीटीआई के मुताबिक इसके अलावा आरबीआई ने 2019-20 के लिए जीडीपी के अनुमान में 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है. अब 2019-20 के लिए जीडीपी का पूर्वानुमान 7.4 से 7.2 प्रतिशत हो गया है. साथ ही आरबीआई ने वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति का संशोधित अनुमान घटाकर 2.40 प्रतिशत कर दिया. उसने वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही के लिए इसे 2.90 से तीन प्रतिशत और दूसरी छमाही के लिए 3.50 से 3.80 प्रतिशत रखा है.

क्या है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट?

रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई अन्य बैंकों को कर्ज देता है. इसी कर्ज से बैंक ग्राहकों को ऋण की सुविधा मुहैया कराते हैं. अगर रेपो रेट कम होता है तो इसका मतलब है कि बैंक से मिलने वाले सभी प्रकार के कर्ज सस्ते हो जाएंगे. वहीं, बैंकों को आरबीआई में धन जमा कराने पर जिस दर से ब्याज मिलता है उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं.