भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को इस लोक सभा चुनाव के लिए अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया. इसे ‘संकल्प पत्र’ नाम दिया गया है. इसमें जो पांच प्रमुख वादे किए गए हैं उनमें एक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का है. दूसरा- जम्मू-कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद-35ए को ख़त्म करने और तीसरा- समान नागरिक संहिता लागू करने, चौथा- नागरिकता संशोधन कानून लागू करने और पांचवां- आतंकवाद को बिल्कुल भी बर्दाश्त (ज़ीरो टॉलरेंस) न करने का है.

घोषणा पत्र समिति के प्रमुख केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मीडिया को इस ‘संकल्प पत्र’ की प्रमुख चीजों से अवगत कराया. उन्होंने बताया कि भाजपा अगर फिर सत्ता में आती है तो किसी राज्य की पहचान से समझौता किए बग़ैर देश में नागरिकता संशोधन कानून लागू किया जाएगा. इस कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान आदि पड़ोसी देशों से आए ग़ैर-मुस्लिमों को आसानी से भारत की नागरिकता दिए जाने का इंतज़ाम है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार कोशिश के बावज़ूद इस कानून को अभी संसद से पारित नहीं करा सकी है.

ग़ौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून पर भाजपा के सहयोगी दलों में ही मतभेद है. ख़ास तौर पर पूर्वोत्तर के राजनीतिक दलों का इसे लेकर तीखा विरोध है. उनका तर्क है नागरिकता संशोधन कानून से उनके इलाकों में जनसंख्या घनत्व का संतुलन गडबड़ा जाएगा. चूंकि दूसरे देशों से आए अधिकांश शरणार्थी इन्हीं राज्यों में रह रहे हैं. इसलिए उन्हें नागरिकता मिलने के बाद स्थानीय आबादी पर दबाव बढ़ेगा. उनके लिए ख़तरा पैदा हो जाएगा. इससे दाेनों वर्गों में आपसी संघर्ष की भी स्थिति पैदा हो सकती है.

अलबत्ता नागरिकता संशोधन कानून ही नहीं जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्ज़ा देने वाले संविधान के अनुच्छेद-35ए को लेकर भी भाजपा अपने रुख़ पर क़ायम है. राजनाथ सिंह के मुताबिक, ‘हम मानते हैं कि अनुच्छेद 35-ए राज्य (जम्मू-कश्मीर) के विकास में बाधा बन रहा है.’ ऐसे ही पार्टी के संकल्प पत्र में राम मंदिर निर्माण के लिए संविधान के दायरे में रहते हुए सभी ज़रूरी क़दम उठाने की बात कही गई है. साथ में देश में ‘समान नागरिक संहिता’ लागू करने का भी वादा किया गया है.

सिंह के अनुसार, ‘जब तक भारत समान नागरिक संहिता नहीं अपना लेता लैंगिक असमानता को ख़त्म नहीं किया जा सकता. समान नागरिक संहिता से महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा होगी. लिहाज़ा भाजपा फिर दोहराती है कि वह समान नागरिक संहिता का एक ऐसा दस्तावेज़ तैयार करेगी जो आधुनिक समय और समाज की सभी ज़रूरतें पूरी करता हो. साथ ही विभिन्न समुदायों के बीच सौहार्द क़ायम रखने का बंदोबस्त भी करता हो. उन परंपराओं का पालन करता हो.’