भारत ने अमेरिका से जानना चाहा है कि पाकिस्तान के जिन वायु सैनिक अड्‌डों से बीती 27 फरवरी को एफ-16 लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी थी वहां अमेरिकी अधिकारी मौज़ूद थे या नहीं. एफ-16 विमानों के इस्तेमाल काे लेकर उभरे विवाद के मद्देनज़र यह जानकारी मांगी गई है.

द इकॉनाॅमिक टाइम्स के अनुसार अमेरिका की ओर से अभी इस पर काेई ज़वाब नहीं दिया गया है. हालांकि यह मसला अमेरिकी प्रशासन में शीर्ष स्तर पर विचाराधीन ज़रूर है. सूत्रों के हवाले से आई ख़बर में बताया गया है कि पाकिस्तान सरकार ने 27 फरवरी काे एफ-16 लड़ाकू विमानों को भारत की ओर भेजने से पहले सभी अमेरिकी अफ़सरों से कह दिया था कि वे उन वायु सैनिक अड्डों को छोड़ दें जहां उनकी तैनाती की गई है.

यहां ध्यान रखने लायक है कि अमेरिका ने पाकिस्तान को कुछ शर्ताें के साथ एफ-16 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति की थी. इस बाबत हुए समझौते में स्पष्ट है कि एफ-16 लड़ाकू विमानों का किसी देश के ख़िलाफ़ हमले-ज़वाबी हमले के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. सिर्फ़ आतंकरोधी अभियानों में ही इनका इस्तेमाल हो सकता है. ख़बर के मुताबिक इस शर्त का पालन हो रहा है या नहीं ये देखने के लिए अमेरिकी अधिकारी भी पाकिस्तानी वायु सैनिक अड्‌डों पर तैनात किए गए हैं. इन्हीं के बाबत भारत ने जानकारी मांगी है.

दरअसल भारत का दावा है कि 27 फरवरी को उसके सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले के लिए पाकिस्तान ने एफ-16 विमानों का इस्तेमाल किया था. हालांकि उसकी यह कोशिश भारतीय वायु सेना ने विफल कर दी. इस दौरान भारत की ज़वाबी कार्रवाई में पाकिस्तान का एक एफ-16 विमान भी गिरा दिया गया. भारत ने इस दावे की पुष्टि के लिए एफ-16 विमान से भारतीय क्षेत्र में दागी गई एमराम मिसाइल के टुकड़े भी दिखाए थे. लेकिन पाकिस्तान लगातार भारत के इस दावे को नकार रहा है.

ग़ौरतलब है कि 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ (केंद्रीय आरक्षित पुलिस बल) के काफ़िले पर आतंकी हमले में 42 जवान मारे गए थे. इस हमले की ज़िम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने ली थी. लिहाज़ा भारत ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट स्थित जेईएम के शिविरों पर बम गिराए. इसके ज़वाब में अगले दिन पाकिस्तान के एफ-16 विमानों ने भारत के सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश की थी.