भगौड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को ब्रिटेन से भारत प्रत्यर्पित कराए जाने के प्रयासों में एक और कामयाबी मिली है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सोमवार को ब्रिटेन के एक हाईकोर्ट ने प्रत्यर्पण को रोकने संबंधी विजय माल्या की एक याचिका खारिज कर दी. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि उन्हें इस संबंध में मौखिक पक्ष रखने के लिए आधे घंटे का समय दिया जाएगा.
इस बारे में हाईकोर्ट के एक प्रवक्ता का कहना है कि विजय माल्या के पास अदालत के समक्ष आवेदन करने के लिए पांच दिन का वक्त है. अगर कोई आवेदन दिया जाता है तो मामला हाईकोर्ट के जज के सामने पेश किया जाएगा. लेकिन पुनर्विचार प्रक्रिया में मौखिक सुनवाई ही होगी. उस दौरान भारत सरकार को भी अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा. इसके बाद फैसला होगा कि क्या इस मामले में पूरी सुनवाई किए जाने की जरूरत है या नहीं.
इससे पहले बीते साल नौ दिसंबर को ब्रिटेन के वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने विजय माल्या के प्रत्यर्पण संबंधी फैसला सुनाया था. उसके बाद वहां के गृह सचिव साजिद जाविद ने भी माल्या के भारत प्रत्यर्पण पर मंजूरी की मुहर लगा दी थी. भारत के भगौड़े कारोबारी ने उन्हीं आदेशों के खिलाफ वहां की हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी. लेकिन वहां से भी उसे कोई राहत नहीं मिल पाई है. हालांकि विजय माल्या के पास अब भी वहां के सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प शेष है.
विजय माल्या पर जान-बूझकर भारतीय बैंकों के नौ हजार करोड़ रुपये की रकम नहीं चुकाने के आरोप हैं. कर्ज की रकम चुकाने से बचने के लिए वे 2016 में देश छोड़कर ब्रिटेन भाग गए थे. उसके बाद से वे वहीं रह रहे हैं. इसके अलावा उनके खिलाफ मनी लॉन्डरिंग के मामले दर्ज हैं. बीते दिनों उन्होंने एक ट्वीट के जरिये भारतीय बैंकों की शत-प्रतिशत मूल रकम चुकाने का प्रस्ताव भी दिया था. उनका यह भी कहना था कि भारत सरकार बैंकों से हासिल किए गए कर्ज से कहीं अधिक कीमत वाली उनकी संपत्तियां भी जब्त कर चुकी है.
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