सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) ने आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को ज़मानत देने का विरोध किया है. इस बाबत सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा देकर कहा है, ‘लालू प्रसाद यादव की सुनाई गई सभी सजाएं अगर मिला ली जाएं तो उन्हें 27.5 साल क़ैद सज़ा मिली है, 3.5 साल की नहीं. राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने जो किया (भ्रष्टाचार) उसने पूरे देश की आत्मा को हिला दिया था. ऐसे में उन्हें उनकी राजनीतिक गतिविधियां चलाने के लिए किसी तरह की राहत नहीं दी जानी चाहिए.’

सीबीआई ने यह भी दलील दी कि लालू प्रसाद यादव ‘अदालत को ग़ुमराह कर रहे हैं. वे लोक सभा चुनाव के लिए ज़मानत चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य को आधार बताया है.’ सीबीआई ने यह आरोप भी लगाया कि वैसे भी ‘लालू प्रसाद यादव क़ैद में रहते हुए भी अपनी राजनीतिक गतिविधियां चला रहे हैं. वे इस वक़्त स्वास्थ्य के आधार पर ही अस्पताल के विशेष वार्ड में भर्ती हैं.’

ग़ाैरतलब है कि लालू प्रसाद यादव को 2017 में चारा घोटाले से जुड़े मामलों में सज़ा सुनाई गई थी. यह घाेटाला उस समय हुआ जब 1990 के दशक में लालू प्रसाद संयुक्त बिहार के मुख्यमंत्री हुआ करते थे. इस मामले में सज़ा मिलने के बाद उन्हें झारखंड की केंद्रीय जेल में भेज दिया गया था. उन्होंने ख़राब स्वास्थ्य के आधार पर कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट में ज़मानत के लिए अर्ज़ी लगाई थी. इस पर बुधवार को अदालत अपना फ़ैसला सुना सकती है.