ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने ​जलियांवाला बाग हत्याकांड को लेकर अफसोस जताया है. खबरों के मुताबिक बुधवार को ब्रिटेन की संसद में उन्होंने कहा, ‘उस दौरान जो कुछ भी हुआ और उसकी वजह से लोगों को जो पीड़ा पहुंची, उसका हमें बेहद अफसोस है.’ थेरेसा मे ने उस नरसंहार को भारत-ब्रिटेन के इतिहास में शर्मनाक दाग भी बताया. हालांकि उन्होंने उस घटना को लेकर माफी नहीं मांगी. इस पर विपक्ष के नेता जर्मी कोर्बिन ने थेरसा मे से उस हत्याकांड पर साफ, स्पष्ट और विस्तृत माफी मांगने के लिए कहा.

इससे पहले 2013 में भारत दौरे पर आए ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने भी उस हत्याकांड को इतिहास की ‘शर्मनाक घटना’ बताया था. हालांकि उन्होंने भी इसके लिए माफी नहीं मांगी थी.

13 अप्रैल को जालियांवाला बाग हत्याकांड के सौ साल पूरे होने जा रहे हैं. इसी के चलते मंगलवार को वहां की संसद में इस घटना पर माफी प्रस्ताव लाया गया था. इस प्रस्ताव का लगभग सभी सांसदों ने समर्थन किया था.

13 अप्रैल, 1919 को पंजाब के अमृतसर में स्थित जलियांवाला बाग में असहयोग आंदोलन के हजारों समर्थक इकट्ठा हुए थे. तब जनरल डायर ने उसके मुख्य प्रवेश द्वार को बंद करवा दिया था और अपने सिपाहियों को निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसाने के आदेश दे दिया था. दस्तावेजों के मुताबिक उस हत्याकांड में 400 लोगों की मौत हुई थी जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे. हालांकि भारत के अधिकारी उस घटना में एक हजार से ज्यादा लोगों के मारे जाने का दावा करते हैं.