ब्लैक होल की यह तस्वीर क्यों खास है?

इस तस्वीर से एक बड़े ब्लैक होल के अस्तित्व का पता चलता है. यह ब्लैक होल मेसिअर-87 (एम-87) नामक आकाशगंगा में स्थित है और धरती से 55 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर है. इसके पहले ली गई तस्वीरों में केवल ब्लैक के होने का अंदाजा लगता था, कोई स्पष्ट तस्वीर नहीं बनती थी.

ब्लैक होल की यह तस्वीर किस तरह ली गई?

इवेंट होराइज़न टेलीस्कोप (ईएचटी) से ब्लैक होल की पहली सीधी तस्वीर लेना संभव हुआ है. ईएचटी असल में दुनियाभर में फैले टेलीस्कोप के नेटवर्क का इस्तेमाल करता है. इस तरह धरती के आकार का एक विशालकाय वर्चुअल टेलीस्कोप में बन जाता है जिसकी सेंसिटिवटी और रिजॉल्यूशन बेजोड़ होता है.

यह ब्लैक होल कितना बड़ा है?

एम-87, अपने आप मे सूर्य से 700 करोड़ गुना बड़ा है. इसकी चौड़ाई करीब दस हजार करोड़ किलोमीटर है. चौड़ाई का यह आंकड़ा, सूर्य से नेपच्यून की दूरी का लगभग 22 गुना है. यानी यह कहा जा सकता है कि यह ब्लैक होल हमारे सोलर सिस्टम को बहुत आसानी से निगल सकता है.

अगर ब्लैक होल में प्रकाश किरणें भी नहीं जा सकतीं तो इसकी तस्वीर लेना कैसे संभव हुआ?

असल में ब्लैक होल की इस तस्वीर को एक तरह का सिलूएट यानी छायाचित्र कहा जा सकता है. इसके आस-पास चमकीले रंग का कोई पदार्थ घूम रहा है जिसके कारण ब्लैक होल वाला हिस्सा अंधेरे से भरा दिखता है और इसकी आकृति का पता चलता है.

ब्लैक होल के एक तरफ का हिस्सा ज्यादा चमकदार क्यों है?

ब्लैक होल और इसके आस-पास के पिंड लगातार गतिमान हैं. इस कारण जब जिस हिस्से का प्रकाश धरती की तरफ आता है, वह चमकीला दिखता है और जहां से प्रकाश किरणें दूसरी दिशा में जाती हैं, वह धुंधला नज़र आता है.

यह आलेख सबसे पहले फाइव पॉइंट्स डॉट इन पर प्रकाशित हुआ था