भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता नितिन गडकरी ने अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के विचारों से सहमति जताई है. उन्होंने कहा है कि देश में हर किसी को अपने विचारों की अभिव्यक्ति का अधिकार है. साथ ही विचारों में असहमतियां ही सही मायने में सच्चा लोकतंत्र है. नितिन गडकरी ने यह बात ​एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में कही है. इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा, ‘हमारी विचारधारा से असहमति रखने वालों को हम राष्ट्र विरोधी नहीं कहना चाहते. यह मीडिया की तरफ से फैलाया गया प्रोपेगेंडा है.’

इससे पहले बीते हफ्ते एक ब्लॉग के जरिये लालकृष्ण आडवाणी ने अभिव्यक्ति के सम्मान और इसकी विविधता को भारतीय लोकतंत्र का सार बताया था. साथ ही यह भी कहा था कि अपनी स्थापना के बाद से ही भाजपा ने कभी उन्हें ‘शत्रु’ नहीं माना जो उसके विचारों से असहमत थे. उनका यह भी कहना था, ‘भारतीय राष्ट्रवाद की अवधारणा में राजनीतिक तौर पर हमसे असहमति रखने वालों को भी हमने कभी राष्ट्र विरोधी नहीं कहा.’

इधर, नितिन गडकरी के इस बयान को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक ‘चुनौती’ के तौर पर भी देखा जा रहा है. पूर्व में भी कई मौकों पर वे ऐसी धारणा बनाने वाली बातें कह चुके हैं. बीते साल नौकरशाहों के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, ‘अगर मैं पार्टी का नेतृत्व करता हूं और मेरे विधायक ठीक से काम नहीं करते, सांसद प्रदर्शन नहीं कर पाते तो उसके लिए मैं जिम्मेदार हूं. क्योंकि वे बेहतर ढंग से काम कर सकें इसके लिए मैंने कुछ नहीं किया.’ हालांकि उसके बाद उन्होंने मीडिया पर उस बयान को गलत ढंग से प्रस्तुत करने के आरोप भी लगाए थे.

हालांकि बीते दिनों उन्होंने यह भी कहा था कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता हैं और प्रधानमंत्री पद की उन्हें कोई लालसा नहीं है. उनका यह भी कहना था कि लोकसभा के इस चुनाव में भाजपा की जीत होगी और नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगे. भाजपा की जीत और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने संबंधी बात उन्होंने आज के इंटरव्यू में एक बार फिर दोहराई हैं. पिछले आम चुनाव में नितिन गडकरी महाराष्ट्र की नागपुर संसदीय सीट से जीते थे. इस बार भी वे इसी सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.