सुप्रीम कोर्ट आज राजनीतिक दलों की फंडिंग से जुड़ी इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को लेकर फैसला सुनाने वाला है. इससे पहले गुरुवार को शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल (एजी) केके वेणुगोपाल कहा कि इस मामले में पारदर्शिता नहीं हो सकती और मतदाताओं को इस बारे में जानने की क्या जरूरत है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में केके वेणुगोपाल ने कहा, ‘पारदर्शिता की बात नहीं हो सकती. मेरे विचार में मतदाताओं को उम्मीदवारों के बारे में जानने का अधिकार है... (लेकिन) उन्होंने यह जानने की क्या जरूरत है कि राजनीतिक दलों को पैसा कहां से मिल रहा है.’

अखबार के मुताबिक अटॉर्नी जनरल राजनीतिक फंडिंग की पारदर्शिता से जुड़े एक सवाल का जवाब दे रहे थे. उन्होंने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ से कहा कि इस बारे में आज की हकीकत को ध्यान में रखना होगा. एजी के मुताबिक इस संबंध में समस्याओं को समझे बिना पारदर्शिता नहीं बरती जा सकती.

खबर के मुताबिक इससे पहले वेणुगोपल ने पार्टियों को मिलने वाले चंदे को सीमित किए जाने के मुद्दे पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा था कि इस योजना के तहत चंदे देने वाले व्यक्ति की पहचान इसलिए उजागर नहीं की जाती, क्योंकि इससे उस व्यक्ति (डोनर) को अन्य दलों द्वारा प्रताड़ित किए जाने का भय होता है. एक अन्य फैसले के हवाले से केके वेणुगोपल ने यह भी कहा कि डोनर के पास निजता का अधिकार है.

उधर, सीजेआई गोगोई ने एजी से पूछा कि क्या बैंकों को बॉन्ड खरीदने वाले की पहचान पता होगी. इस पर एजी की तरफ से स्पष्ट जवाब नहीं आने पर सीजेआई ने कहा, ‘अगर खरीदार की पहचान नहीं पता होगी तो इससे बहुत ज्यादा जटिलताएं हो जाएंगी. कालाधन दूर करने की आपकी पूरी कवायत नकारात्मक है.’ इसके बाद एजी ने कोर्ट को बताया कि बैंक को बॉन्ड खरीदने वाले व्यक्ति की पहचान पता होती है क्योंकि ऐसा करते समय उसे केवाईसी (ग्राहक पहचान) संबंधी औपचारिकता पूरा करना अनिवार्य होता है.

इस पर पीठ के सदस्य जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि केवाईसी से केवल खरीदार की पहचान होगी, यह लेन-देन की प्रामाणिकता की गारंटी नहीं देता. उन्होंने कहा कि इस तरह फर्जी कंपनियां भी चंदा दे सकेंगी. वहीं, एजी के मुताबिक लोग केवल अपने खातों में जमा पैसे के जरिये बॉन्ड खरीद सकते हैं, इसलिए हर पैसे का हिसाब रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि आयकर अधिकारी कभी भी यह जानकारी ले सकते हैं. वेणुगोपाल ने अदालत को बताया कि राजनीतिक चंदे से जुड़ी यह योजना पुरानी व्यवस्था जितनी बुरी नहीं है. उन्होंने कहा कि यह समय ही बताएगा कि यह योजना कितनी कामयाब रही.

इस बीच, चुनाव आयोग ने पीठ को बताया कि बॉन्ड के रूप में राजनीतिक दलों बहुत ज्यादा चंदा मिला है. आयोग की तरफ से पेश हुए वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि पार्टियों ने खुद पार्टियों ने आयोग को यह जानकारी दी है. इस पर सीजेआई ने हैरानी जताई और कहा कि बॉन्ड सिस्टम की वजह से राजनीतिक दलों को मिले चंदे से जुड़ी जानकारी का पता नहीं चला. इस मामले में याचिकाकर्ता एडीआर के वकील प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि राजनीतिक दलों को बॉन्डों से 221 करोड़ रुपये मिले जिसमें से 210 करोड़ रुपये अकेली भाजपा को प्राप्त हुए.