भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता मेनका गांधी ने मुस्लिम मतदाताओं से उन्हें वोट देने की अपील करते हुए एक ऐसा बयान दिया है जिस पर विवाद खड़ा हो सकता है. उन्होंने कहा है, ‘मैं इस चुनाव में जीत हासिल कर रही हूं. लेकिन मुझे यह जीत अगर मुसलमान वोटरों के बगैर मिलती है तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा. ऐसा होने पर मन खट्टा हो जाएगा. फिर सांसद बनने पर जब मुसलमान किसी काम के लिए मेरे पास आएंगे तो उनके प्रति मेरा रवैया भी वैसा ही होगा.’

मेनका गांधी ने आगे कहा, ‘मैं आपकी तरफ दोस्ती का हाथ लेकर आई हूं. आपको भी इसके लिए अभी नींव रखनी होगी. आप चाहें तो पीलीभीत में फोन करके जानकारी ले सकते हैं कि वहां के लोगों के प्रति मेरा व्यवहार कैसा था. अगर आपको लगे कि मैंने वहां कोई गुस्ताखी की हो तो मुझे वोट मत देना. लेकिन अगर आपको महसूस होता कि कल आपको मेरी जरूरत पड़ेगी तो मेरा समर्थन करें.’ इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘हम महात्मा गांधी की छठवीं औलाद नहीं हैं कि हम सिर्फ चीजें देते ही रहें और चुनाव में मार खाएं.’

इधर, मेनका गांधी के इस बयान पर कांग्रेस के प्रवक्ता संजय खान की प्रतिक्रिया आई है. एक ट्वीट के जरिये उन्होंने कहा है कि अब भाजपा को हराना हमारी (कांग्रेस) जिम्मेदारी है. भाजपा के नेता वोट के लिए लोगों को धमका रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग से भी मेनका गांधी पर उनके इस बयान के लिए जल्द से जल्द कार्रवाई करने की अपील की है.

मेनका गांधी ने पिछला आम चुनाव उत्तर प्रदेश की पीलीभीत संसदीय सीट से लड़ा था जबकि तब के चुनाव में उनके बेटे वरुण गांधी सुल्तानपुर से प्रत्याशी थे. इन दोनों को ही 2014 के चुनाव में जीत मिली थी. लेकिन इस चुनाव में भाजपा ने मां-बेटे की सीटें आपस में बदल दी हैं. ऐसे में मेनका गांधी अब सुल्तानपुर सीट से तो वहीं वरुण गांधी पीलीभीत से चुनाव लड़ रहे हैं.