केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी अपनी पढ़ाई को लेकर कल से सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं. गुरुवार को अमेठी लोकसभा सीट से नामांकन भरते हुए अपने हलफनामे में उन्होंने बताया है कि वे ग्रेजुएट नहीं हैं. जबकि 2004 में उन्होंने दिल्ली के चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था और तब अपने शपथ पत्र में कहा था कि वे बीए पास हैं. वहीं 2014 में अमेठी से ही नामांकन भरते वक्त उन्होंने अपनी शैक्षिक योग्यता बीकॉम बताई थी. ट्विटर और फेसबुक पर विरोधियों के साथ-साथ अन्य लोग भी इन जानकारियों के हवाले से उन पर सवाल उठा रहे हैं. पत्रकार आदित्य मेनन का ट्वीट है, ‘स्मृति ईरानी ने अगर कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की तो यह कोई दिक्कत वाली बात नहीं है. असली मुद्दा यह है कि उन्होंने अपने हलफनामों में गलत जानकारियां क्यों दी थीं.... क्यूं करना ये सब?’

इसके साथ ही यहां ईरानी पर एक से बढ़कर एक तंजभरी प्रतिक्रियाओं की भरमार है. एक यूज़र ने लिखा है, ‘हमारी पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री येल यूनिवर्सिटी से डबल पीएचडी हैं... एक फेकुलर बायोलॉजी में और दूसरी जुमला टेक्नोलॉजी में. और जो कोई भी इस पर शक करेगा उसे देश विरोधी माना जाएगा.’ सोशल मीडिया में इस मामले पर आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :

प्रतीक डेथ | @iampratik128

क्यूंकि डिग्री भी कभी फेक थी :

पन्सटर | @Pun_Starr

स्मृति ईरानी 2014 में ग्रेजुएट थीं. 2019 में उन्होंने इंटरमीडिएट किया. मोदी सरकार ने पांच साल में भारत के साथ कुछ यही किया है.

चाकोबार जेट ली (वसूली भाई) | @Vishj05

2014 में स्मृति ईरानी ग्रेजुएट थीं. 2019 में वे चौकीदार बन गईं.

दुष्यंत | @atti_cus

मुद्दा यह नहीं है कि स्मृति ईरानी 12वीं पास हैं. मुद्दा ये है कि उन्होंने हलफनामें में अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में झूठ बोला. तो मसला डिग्री नहीं बल्कि शपथ लेकर झूठ बोलने का है.

सुयश सुप्रभ | facebook

स्मृति ईरानी ने डिग्री वापस ले ली है. नमक थोड़ा कम था. अगली बार अच्छी वाली देंगी. एकदम कुरकुरी.