केंद्र सरकार ने संयुक्त सचिव के पदों के लिए लेटरल-एंट्री के तहत निजी क्षेत्र के नौ पेशेवरों का चयन किया है. सरकार का यह कदम नीति निर्धारण के मामले में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक संभवतः यह पहली बार है जब अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों का इतना बड़ा समूह सरकार में शामिल होगा. अब तक इन पदों पर अधिकतर उन्हीं लोगों को नियुक्त किया जाता था जो संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षाओं में पास होकर अधिकारी बनते थे. खबर के मुताबिक निजी क्षेत्र से आए पेशेवरों का स्तर भी वैसा ही हो, इसलिए इनके चयन की प्रक्रिया यूपीएससी द्वारा संचालित की गई थी.

अखबार ने बताया कि पहले भी लेटरल-एंट्री के जरिये कुछ विशेषज्ञों को सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों में शामिल किया जाता रहा है. इनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा मोंटेक सिंह आहलुवालिया, बिमल जालान, विजय केलकर, आरवी शाही, परमेश्वरन अय्यर और राजेश कोटेचा जैसे लोग शामिल हैं. अय्यर फिलहाल स्वच्छता सचिव हैं और कोटेजा आयुष मंत्रालय संभालते हैं. इनके अलावा यूपीएससी ने कृषि, नागरिक उड्डयन, वित्त, परिवहन और नौवहन जैसे विभागों के लिए बाकी विशेषज्ञों की सूची जारी की है. ये सभी कॉन्ट्रैक्ट के तहत विभागों में काम करेंगे.

रिपोर्ट के मुताबिक केपीएमजी नामक सलाहकारी फर्म में बतौर एयरोस्पेस एवं रक्षा प्रमुख काम कर रहे अंबर दुबे को नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ काम करने के लिए चुना गया है. वहीं, कृषि क्षेत्र से जुड़े काम करने वाली एक एजेंसी की सदस्य काकोली घोष कृषि मंत्रालय में काम करेंगी. इसके अलावा सरकार द्वारा संचालित कंपनी एनएचपीसी में कार्यरत सुजीत कुमार बाजपेयी को पर्यावरण मंत्रालय में नियुक्त किए जाने की सिफारिश की गई है.

अन्य विशेषज्ञों की बात करें तो पनामा रिन्युएबल एनर्जी ग्रुप के सीईओ दिनेश दयानंद जगदले ऊर्जा मंत्रालय, सौरभ मिश्रा वित्तीय सेवा विभाग और राजीव सक्सेना आर्थिक मामलों से जुड़े विभाग में बतौर संयुक्त सचिव काम करेंगे. वाणिज्य मंत्रालय के लिए अरुण गोयल और सड़क परिवहन मंत्रालय के लिए सुमन प्रसाद सिंह का चयन किया गया है. वहीं, भूषण कुमार पोत परिवहन मंत्रालय में रह कर काम करेंगे.

रिपोर्ट के मुताबिक इन नियुक्तियों को लेकर सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘यह बहुत बड़ा बदलाव है. शायद पहली बार निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया जा रहा है. पूरी प्रक्रिया यूपीएससी के जरिये पूरी की गई जो कि अच्छी बात है.’ अधिकारी ने कहा कि इन सभी को संयुक्त सचिव के स्तर का वेतन व लाभ दिए जाएंगे. गौरतलब है कि नीति आयोग ने प्रयोग के तहत निजी क्षेत्र के कई लोगों को लेटरल-एंट्री के जरिये शामिल किया है. हालांकि इसका काफी विरोध हो चुका है. लेकिन नीति आयोग अपने इस कदम का बचाव करता रहा है.