बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘अली-बजरंगबली’ वाले बयान को लेकर पलटवार किया है. खबरों के मुताबिक शनिवार को उत्तर प्रदेश के बदायूं में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘अली और बजरंगबली दोनों हमारे अपने हैं. हम बजरंगबली को इसलिए चाहते हैं क्योंकि वे हमारी दलित जाति से जुड़े हुए हैं.’ मायावती ने आगे कहा, ‘बजरंगबली की जाति की खोज मैंने नहीं बल्कि खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने की है.’ इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा के इस चुनाव में योगी आदित्यनाथ की पार्टी को न तो अली का वोट मिलेगा और न ही बजरंगबली का. बदायूं लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव सपा-बसपा महागठबंधन के उम्मीदवार हैं.

आज की रैली को संबोधित करने से पहले मायावती ने एक ट्वीट के जरिये लोगों को रामनवमी की बधाई भी दी थी और कहा था, ‘ऐसे समय में जब लोग श्रीराम के आदर्शों का स्मरण कर रहे हैं तब चुनावी स्वार्थ के लिए बजरंगबली और अली का विवाद व टकराव पैदा करने वाली सत्ताधारी ताकतों से सावधान रहना है.’

इससे पहले हाल में उत्तर प्रदेश के देवबंद में एक रैली को संबोधित करते हुए मायावती ने मुसलमान वोटरों से समाजवादी पार्टी (सपा)-बसपा गठबंधन के पक्ष में वोट देने की अपील की थी. उनके उस बयान पर योगी आदित्यनाथ ने पलटवार किया था. साथ ही कहा था कि सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस को अगर ‘अली’ पर यकीन है तो उन्हें बजरंगबली पर विश्वास है. इसके साथ ही उन्होंने पूर्वी उत्तर प्रदेश की तरह राज्य पश्चिमी हिस्सें में भी विपक्षी दलों को हराने की अपील की थी. हालांकि दोनों ही नेताओं को उनके ऐसे बयानों को लेकर चुनाव आयोग ने नोटिस थमाते हुए स्पष्टीकरण भी मांगा था.

बजरंगबली को लेकर योगी आदित्यनाथ बीते साल हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान भी एक विवादित बयान दे चुके हैं. तब राजस्थान के अलवर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने बजरंगबली को ‘दलित और वंचित’ समुदाय का बताया था. तब उन्हें उस बयान के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की तरफ से आलोचनाएं झेलनी पड़ी थीं.