चुनाव आचार संहिता के लगातार उल्लंघन के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नाराज़गी जताई है. इस मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने चुनाव आयोग से यहां तक कह दिया, ‘क्या आपको अपनी ताक़त का अहसास नहीं है?’

सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को भी सुनवाई जारी रखेगा. अदालत ने आयोग के प्रतिनिधियों से कहा है कि वे कल इस बारे में अपना पक्ष रखें. ख़बरों के मुताबिक शीर्ष अदालत चुनाव आयोग की आचार संहिता से जुड़ी शक्तियों के बाबत परीक्षण करेगी. साथ ही देखेगी क्या आयोग चुनाव प्रचार के दौरान धर्म के आधार पर नफ़रत फैलाने वाली बयानबाज़ी करने वालाें सज़ा दे सकता है? अदालत में इसी संबंध में एक याचिका दायर की गई है. इसमें धर्म और जाति के आधार पर बयानबाज़ी करने और वोट मांगने वालों पर सख़्त कार्रवाई की मांग की गई है.

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग से पूछा, ‘आप कर क्या रहे हैं? अगर कोई ऐसा काम करता है जो उसे नहीं करना था ताे ऐसे मामलों में आपको दख़ल देना चाहिए.’ इस पर जब आयोग ने कहा कि उसने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं तो अदालत ने पलटकर प्रश्न किया, ‘आपने किस-किस को कितने नोटिस जारी किए.’ अदालत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस दौरान विशेष ज़िक्र किया और पूछा कि उनके (बयानों के) मामले में क्या कार्रवाई की गई? तब आयोग ने अदालत को बताया कि योगी आदित्यनाथ से संबंधित मामला बंद कर दिया गया है. इससे अदालत और नाराज़ हो गई.

इधर एक अन्य मामले में शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को आदेश दिया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवनकाल पर बनी फिल्म देखे. इसके बाद 22 अप्रैल तक सीलबंद लिफाफ़े में इस फिल्म के बाबत अपनी रिपोर्ट दे. ताकि अदालत इस फिल्म की रिलीज़ के बारे में फ़ैसला कर सके. शीर्ष अदालत में ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ फिल्म के निर्माताओं ने चुनाव आयोग के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की है. आयोग ने फिल्म की रिलीज़ पर प्रतिबंध लगा दिया था. आयोग ने माना था कि इसे चुनाव के दौरान रिलीज़ किए जाने से मतदाता प्रभावित हाे सकते हैं. जबकि निर्माताओं की दलील है कि फिल्म की रिलीज़ रोकना अभिव्यक्ति की आज़ादी का हनन है.