बसपा सुप्रीमो मायावती ने उनके प्रचार करने पर अस्थाई रोक लगाने के लिए चुनाव आयोग पर निशाना साधा है. उन्होंने चुनाव आयोग के इस फैसले को उसकी दलित विरोधी सोच का नतीजा बताया है.

मायावती ने सोमवार रात मीडिया से कहा, ‘मुझे दिए कारण बताओ नोटिस में चुनाव आयोग ने नहीं लिखा है कि मैंने भड़काउ भाषण दिया था. उन्होंने मेरा पक्ष सुने बिना मुझ पर बैन लगा दिया और मोदी-शाह को खुली छूट है...यह चुनाव आयोग के इतिहास का काला आदेश है. ऐसा लगता है कि ये किसी के दबाव में आकर लिया गया फैसला है ताकि हम दूसरे चरण का प्रचार न कर सकें.’

मायावती ने आगे कहा, ‘आयोग ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ कोई आदेश नहीं दिया जबकि वे खुलेआम नफरत फैला रहे हैं. आगरा में मेरी रैली से एक दिन पहले मुझ पर रोक लगाना, चुनाव आयोग की दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाता है.’

सोमवार को आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में चुनाव आयोग ने योगी आदित्यनाथ और बसपा प्रमुख मायावती के प्रचार करने पर रोक लगा दी. योगी आदित्यनाथ 72 घंटे और मायावती 48 घंटे तक प्रचार नहीं कर पाएंगी. इस दौरान दोनों नेता ना ही कोई रैली को संबोधित कर पाएंगे और ना ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सकेंगे.