प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव में जीत के लिए अपने भाषणों में सेना के नाम का उपयोग करने के आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने सोमवार को कहा कि राष्ट्रवाद और सैनिकों का बलिदान भी उतने ही महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे हैं जितना किसानों की मौत. पीटीआई के मुताबिक नरेंद्र मोदी ने दूरदर्शन को दिए एक साक्षात्कार में यह बात कही है. इसमें उन्होंने कहा कि देश पिछले 40 साल से आतंकवाद से जूझ रहा है.

खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘यदि हम लोगों को नहीं बताएंगे कि इस पर (आतंकवाद पर) हमारे विचार क्या हैं तो फिर इसमें क्या तर्क रह जाएगा. क्या कोई देश बिना राष्ट्रवाद की भावना के आगे बढ़ सकता है? एक ऐसे देश में जहां हजारों की संख्या में सैनिकों ने बलिदान दिया हो, क्या यह चुनावी मुद्दा नहीं होना चाहिए? जब किसान की मौत होती है तो वह चुनावी मुद्दा बन जाता है, लेकिन जब एक सैनिक शहीद होता है तो वह चुनावी मुद्दा नहीं बन सकता? यह कैसे हो सकता है?’

दरअसल पिछले हफ्ते नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी सभा में पहली बार मताधिकार का उपयोग करने वाले मतदाताओं से प्रश्न किया था कि क्या वे अपना पहला मत पाकिस्तान के बालाकोट में किए गए हवाई हमले को समर्पित कर सकते हैं. साथ ही उन्होंने लोगों से उनका वोट पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सैनिकों को समर्पित करने का भी अनुरोध किया था. उनके इस बयान पर विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री चुनाव में जीत के लिए सुरक्षा बलों के नाम का उपयोग कर रहे हैं.

चुनाव आयोग ने इस बात का संज्ञान लिया है और वह मोदी के भाषण की समीक्षा कर रहा है. प्रधानमंत्री ने यह बयान महाराष्ट्र के लातूर में दिया था. वहां के चुनाव अधिकारियों ने चुनाव आयोग को सूचित किया है कि प्रथम दृष्टया यह आयोग के आदेश का उल्लंघन लगता है. बता दें कि आयोग ने पार्टियों से चुनाव में सैन्य बलों के नाम का उपयोग करने पर रोक लगाई है.

वहीं, कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना ‘न्याय’ पर टिप्पणी करते हुए मोदी ने कहा कि इस घोषणा के साथ ही कांग्रेस ने यह मान लिया है कि पिछले 60 साल में उसने देश के लोगों के साथ ‘महान अन्याय’ किया है. उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए सवाल किया, ‘क्या वे सच में न्याय देंगे?’ इसके अलावा साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे अपने पिता (राजीव गांधी और बोफोर्स मामला) के पाप धोने के लिए बार-बार राफेल मुद्दे को उछाल रहे हैं.