अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम बढ़ने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में न के बराबर बदलाव आया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक बीती दस मार्च से 10 अप्रैल के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम नौ प्रतिशत तक बढ़े हैं. इसी दौरान भारत में पेट्रोल के दाम में एक प्रतिशत से भी कम की बढ़ोतरी हुई है. यह सामान्य स्थिति नहीं हैं, क्योंकि भारत में तेल उत्पादों की कीमतें हमेशा अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर घटती-बढ़ती हैं. हालांकि चुनाव के दौरान ये कीमतें अक्सर रुक जाती हैं. फिलहाल देश में आम चुनाव का माहौल है. इसलिए असामान्य होते हुए भी, पेट्रोल-डीजल के दाम न बढ़ना हैरान नहीं करता.

हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक जुलाई 2017 से अप्रैल 2018 के बीच ऐसा चार बार देखने को मिला जब अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले पेट्रोल के दाम बहुत कम बढ़े. यह स्थिति तीन बार किसी विधानसभा चुनाव से एक महीना पहले देखने को मिली. अखबार ने बताया कि अप्रैल-मई 2018 में (दस से दस तारीख के बीच) में कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले पेट्रोल के दाम बढ़ना लगभग रुक गया था. जबकि उसी दौरान कच्चे तेल के दाम 11 प्रतिशत तक बढ़े थे.

वहीं, साल 2017 में गुजरात विधानसभा चुनावों के समय भी ऐसा देखने को मिला था. दिसंबर में मतदान से पहले अक्टूबर-नवंबर के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम दस प्रतिशत तक बढ़े थे. लेकिन उस दौरान भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बिलकुल नहीं बढ़े. गौर करने वाली बात यह है कि उससे पहले दो प्रतिशत तक बढ़ाए गए दाम नवंबर-दिसंबर तक एक प्रतिशत और कम कर दिए गए. इसी तरह, 2018 में सितंबर-अक्टूबर के बीच कच्चे तेल के दाम आठ प्रतिशत तक बढ़े थे. लेकिन घरेलू बाजार में तेल के दाम केवल दो प्रतिशत बढ़ाए गए. उस समय सरकार ने ढाई रुपये की एक्साइज ड्यूटी भी खत्म कर दी थी.