हरियाणा में आम आदमी पार्टी (आप) ने प्रदेश की बिल्कुल नए राजनीतिक दल जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के साथ गठबंधन किया है. गठबंधन में शामिल इन दोनों दलों ने यह तय किया है कि जेजेपी हरियाणा की दस में से सात सीटों पर चुनाव लड़ेगी और दिल्ली प्रदेश की सत्ताधारी आप तीन सीटों पर. कौन सी पार्टी किस सीट पर चुनाव लड़ेगी, यह अभी तय नहीं हो पाया है.

हरियाणा में हुए इस गठबंधन को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं. पहले आप यह चाह रही थी कि हरियाणा में उसका कांग्रेस के साथ गठबंधन हो जाए. लेकिन बात नहीं बनी. आम आदमी पार्टी को लगता है कि दिल्ली और पंजाब के बाद अगर किसी राज्य में उसके लिए सबसे अधिक राजनीतिक संभावनाएं हैं तो वह हरियाणा ही है. ऐसे में वह पिछले काफी समय से हरियाणा में पैर जमाने की कोशिश कर रही है.

आप नेताओं से बातचीत करने पर पता चलता है कि पार्टी हरियाणा में इस बार कम से कम खाता खोलना चाहती है. आप को यह भी लगता है कि अगर लोकसभा चुनावों में उसका सम्मानजनक प्रदर्शन रहा तो वह नवंबर-दिसंबर, 2019 में होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनावों के लिए प्रदेश के किसी प्रमुख दल के साथ और सम्माजनक गठबंधन में शामिल होने के अवसर तलाश सकती है और नई राज्य सरकार में गठबंधन के सहारे ही उसकी हिस्सेदारी कायम हो सकती है.

दूसरी तरफ ओमप्रकाश चौटाला के इंडियन नेशनल लोक दल से निकली जननायक जनता पार्टी है. ओमप्रकाश चौटाला के पोते और लोकसभा सांसद दुष्यंत चौटाला इस पार्टी के कर्ता-धर्ता हैं. इसका गठन हाल ही में हुआ है. लेकिन हरियाणा में विधानसभा की एक सीट के लिए हुए उपचुनाव में इस पार्टी ने अपना दम दिखाया. दुष्यंत चौटाला की सभाओं में काफी लोग आ रहे हैं. कुछ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि पूरे हरियाणा में युवाओं के बीच सबसे लोकप्रिय नेता दुष्यंत चौटाला हैं. वे किसानों की बदहाली के मुद्दे को बेहद प्रभावी ढंग से लगातार उठा रहे हैं.

दरअसल, आप और जेजेपी ने गठबंधन तो कर लिया है, लेकिन अभी कोशिशें इस बात की भी चल रही हैं कि इस गठबंधन में कांग्रेस को भी शामिल कर लिया जाए. अभी हरियाणा में स्थिति यह है कि चार प्रमुख राजनीतिक ताकतें मैदान में हैं. एक केंद्र और प्रदेश की सत्ताधारी भाजपा है तो दूसरी कांग्रेस. प्रदेश की तीसरी ताकत इंडियन नेशनल लोक दल है और चौथी ताकत के तौर आप और जेजेपी का गठबंधन है.

राजनीतिक जानकार यह भी मान रहे हैं कि अगर कांग्रेस इस गठबंधन में नहीं शामिल हुई तो पूरी ताकत लगाकर आप और जेजेपी यह कोशिश करेंगे कि उनके गठबंधन को इंडियन नेशनल लोक दल से अधिक वोट मिलें. इसका मतलब यह हुआ कि यह गठबंधन इंडियन नेशनल लोक दल को पीछे छोड़कर प्रदेश में तीसरी ताकत बनना चाहता है. ऐसी स्थिति में इस गठबंधन को लोकसभा चुनावों में तो कोई खास फायदा नहीं होगा, लेकिन कुछ ही महीने बाद हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनावों में उसके लिए सकारात्मक स्थिति बन सकती है.

विधायकी के चुनावों में क्षेत्र छोटा होने का फायदा इस गठबंधन को कुछ विधानसभा सीटों पर जीत के रूप में मिल सकता है. इसके अलावा लोकसभा के प्रदर्शन के आधार पर वह विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस पर हाथ मिलाने का दबाव बना सकता है. आप के कर्ताधर्ता अरविंद केजरीवाल को यह भी लगता है कि अगर उनकी पार्टी हरियाणा में मजबूत होती है तो इसका फायदा उन्हें आठ-नौ महीने के अंदर दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी मिल सकता है.

कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि लोकसभा चुनावों में आप और जेजेपी गठबंधन की वजह से सबसे अधिक नुकसान कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोक दल को हो सकता है. क्योंकि यह माना जा रहा है कि यह गठबंधन सत्ताविरोधी माहौल का फायदा उठाकर विपक्षियों के वोट में ही सेंध लगाने का काम करेगा. अगर ऐसा होता है तो इसका सबसे अधिक फायदा भाजपा को होगा और 2014 की तरह एक बार फिर से हरियाणा में वह बेहतरीन प्रदर्शन दोहरा सकती है.

हालांकि, इस गठबंधन के अलग चुनाव लड़ने से विपक्षी वोटों में बिखराव का अहसास कांग्रेस को भी है. यही वजह है कि कांग्रेस की ओर से अब भी इसके साथ किसी तरह के गठजोड़ की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई. कांग्रेसी सूत्र बता रहे हैं कि इस दिशा में बातचीत चल भी रही है. कुल मिलाकर देखें तो यह गठबंधन अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी कितनी बढ़ा पाएगा यह तो स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह साफ दिख रहा है कि कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोक दल की स्थिति को कमजोर करने का काम वह जरूर करेगा.