कांग्रेस ने बीते हफ्ते लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र 18 और उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी. इस दौरान उत्तर प्रदेश के नौ, हरियाणा के छह और मध्य प्रदेश के तीन उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया गया. इनमें से एक नाम देवाशीष जरारिया का भी है. कांग्रेस ने देवाशीष को मध्य प्रदेश की भिंड लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा है. अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट से चुने जाने के बाद से 28 साल के देवाशीष जरारिया स्थानीय राजनीतिक हलक़ों में चर्चा में है. लेकिन इसकी वजह केवल उनका दलित और कांग्रेस का सबसे युवा उम्मीदवार होना नहीं है.

स्थानीय कांग्रेस में कलह की वजह बने

देवाशीष के चयन के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी कलह उभरने की ख़बरें हैं. स्थानीय मीडिया के मुताबिक़ पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया को देवाशीष के नाम पर आपत्ति थी. जानकारों के मुताबिक़ मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के प्रयासों के चलते बड़ी मुश्किल से देवाशीष को टिकट मिलना संभव हुआ. लेकिन अब कांग्रेस की एक स्थानीय महिला नेता अनिता चौधरी और जिला कांग्रेस इकाई व कुछ पार्टी पदाधिकारी देवाशीष का विरोध कर रहे हैं.

अनिता का कहना है कि पार्टी में निष्ठावान कार्यकर्ताओं की पूछ परख नहीं है. वहीं, अन्य पदाधिकारी खुलकर कुछ नहीं कह रहे, लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक़ उन्हें महज़ छह महीने पहले कांग्रेस में आए जरारिया को टिकट दिए जाने पर आपत्ति है. ख़बर यह भी है कि उनके चयन के बाद स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता भिंड छोड़कर ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र गुना-शिवपुरी चले गए हैं.

सवर्ण विरोध के चलते विवादित

कांग्रेस में शामिल होने से पहले देवाशीष जरारिया की पहचान दलित समुदाय के हितों व अधिकारों का पक्ष रखने वाले कार्यकर्ता की थी. लेकिन अब यही पहचान स्थानीय स्तर पर उनके विरोध की एक और वजह बन गई है. दलित मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कई बार सवर्ण समाज को निशाने पर लिया है. यह राय कांग्रेस में ही कई नेताओं की है कि देवाशीष केवल एक दलित समर्थक नेता हैं.

इसके अलावा पिछले साल दो अप्रैल को हुए दलित संगठनों के भारत बंद के दौरान देवाशीष अपनी सक्रियता से काफी चर्चा में आए थे और इसके चलते भी उन्हें स्थानीय नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. उधर, इसी को लेकर भाजपा और उसका समर्थक वर्ग सोशल मीडिया पर उनके ख़िलाफ़ अलग से मोर्चा खोले हुए हैं. देवाशीष पर यह भी आरोप है कि वे कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी जैसे (बहुजन) नेताओं के साथी हैं और सत्ता के लालच में अपनी विचारधारा छोड़कर कांग्रेस में आए हैं.

यही कारण है कि कभी ब्राह्मणवाद व मनुवाद के प्रखर विरोधी रहे देवाशीष अब सबको साथ लेकर चलने की बात कह रहे हैं. सत्याग्रह से बातचीत में वे कहते हैं, ‘मुख्यधारा की राजनीति में कुछ विविधताएं होती हैं. उसमें मुझे हर धर्म हर वर्ग हर संप्रदाय के व्यक्ति को साथ लेकर चलना होगा. एक जनप्रतिनिधि के रूप में मेरे लिए हर वर्ग का व्यक्ति महत्वपूर्ण है. मुझे हर किसी की बात सुननी है और उसके लिए काम करना है.’

‘मैं अंबेडकरवादी कांग्रेसी हूं’

यह बात ग़ौर करने वाली है कि देवाशीष अपने समय के कई युवा नेताओं जितने चर्चित नहीं हैं, फिर भी उनकी अभी तक की राजनीतिक पारी काफ़ी अच्छी चल रही है. इसके कारणों को खोजने पर देवाशीष ज़्यादा ध्यान खींचते हैं.

कांग्रेस में आने से पहले देवाशीष जरारिया बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए काम करते थे. वे आए दिन टीवी चैनलों की बहसों में बहुजनों और बसपा का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते थे. लेकिन पिछले साल कुछ विवादों के चलते उन्होंने बसपा छोड़ दी थी. वहीं, उसी दौरान कई लोगों का कहना था कि असल में देवाशीष को पार्टी से निकाला गया था. यह सब मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले देखने को मिला था. तब देवाशीष का कहना था कि वे मायावती के कांग्रेस से गठबंधन नहीं करने के फ़ैसले से निराश हैं. उनका यह भी कहना था कि बसपा में उनके लिए आगे के सभी रास्ते बंद कर दिए गए थे, इसलिए उन्होंने कांग्रेस में जाने का फ़ैसला किया.

लेकिन सिर्फ़ एक साल से भी कम समय में देवाशीष ने कांग्रेस में क्या किया जो पार्टी ने उन्हें संसदीय चुनाव का टिकट दे दिया. इस बारे में देवाशीष बताते हैं, ‘कांग्रेस का विज़न है कि देश में योग्य युवा आगे आएं. पार्टी अंदरूनी तौर पर इस बारे में कार्यक्रम भी चला रही है. वह चाहती है कि जो नौजवान अगले 20-30 साल की राजनीति को मज़बूत स्तंभ दे सकें और नई राजनीति शुरू कर सकें, ऐसे लोगों को मौक़ा दिया जाए. उसी श्रेणी में मुझे रखा गया है. इसलिए मुझे इतनी जल्दी चुना गया.’

उधर, बसपा समर्थक वर्ग दावा रहा है कि देवाशीष जरारिया कभी बसपा के थे ही नहीं. उनके मुताबिक़ वे बसपा में रहकर कांग्रेस पार्टी के लिए काम करते थे. यह साबित करने के लिए सोशल मीडिया पर देवाशीष के कुछ पुराने ट्वीट भी साझा किए गए थे. इनमें उन्होंने कई मुद्दों पर राहुल गांधी का समर्थन किया था और कांग्रेस से चुनाव लड़ने की इच्छा ज़ाहिर की थी.

सत्याग्रह ने उस समय उनसे बातचीत की थी, जिसमें उन्होंने इस बात को स्वीकार किया था कि वे राहुल गांधी की राजनीति से प्रभावित रहे हैं. इन तथ्यों के आधार पर हमने देवाशीष से पूछा कि क्या उनका चयन इस आरोप को सही साबित नहीं करता कि वे हमेशा से कांग्रेसी ही थे. इस पर देवाशीष सफाई देते हैं, ‘वह इतना बड़ा मुद्दा नहीं है. किसी पार्टी में आप आते हैं किसी में जाते हैं. मैं उस पार्टी (बसपा) में था. वह इतिहास हो गया. अब मैं कांग्रेस पार्टी में हूं. यही मेरा वर्तमान और भविष्य है.’

हमने देवाशीष से अन्य युवा नेताओं (कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी) को लेकर भी बात की और इस दौरान कांग्रेस के इस युवा नेता ने अपनी विचारधारा भी स्पष्ट की. देवाशीष ने कहा, ‘कन्हैया कुमार (बिहार के) बेगूसराय से चुनाव लड़ रहे हैं. वहां उनके ख़िलाफ़ महागठबंधन का प्रत्याशी चुनाव लड़ रहा है. वे (कन्हैया) वैचारिक रूप से कम्यूनिस्ट हैं और मैं अंबेडकरवादी विचारधारा वाला कांग्रेसी हूं. भाजपा की विचारधारा और सरकार के ख़िलाफ़ हमारे आंदोलन एक रहे हैं. लेकिन राजनीतिक रूप से वे एक कोने में हैं और मैं दूसरे कोने में.’