प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर ख़ुद को ‘पिछड़ा’ बताया है. बुधवार को महाराष्ट्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस और उसके साथी दलों ने मुझे कई बार गालियां दी हैं. क्योंकि मैं एक पिछड़े वर्ग से आता हूं. लेकिन इस बार उन्होंने मुझे गाली देते-देते पूरे पिछड़े समुदाय को ‘चोर’ बता दिया है.’ नरेंद्र मोदी के इस बयान के बाद यह बहस फिर छिड़ गई है कि वे पिछड़े समाज से आते हैं या नहीं.

2014 से पहले कभी भी ख़ुद को पिछड़ा नहीं बताया

जानकार सवाल उठाते हैं कि बतौर नेता नरेंद्र मोदी को अपनी पिछड़ी जाति का ध्यान 2014 के आम चुनाव से क्यों आया. जाने-माने बुद्धिजीवी व दलित चिंतक कांचा इलैया कारवां पत्रिका में प्रकाशित अपने एक लेख में लिखते हैं, ‘गुजरात के 2002, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में मोदी ने ख़ुद को पिछड़ा दिखाने में कोई फ़ायदा नहीं समझा. तब उन्होंने ख़ुद को एक बनिये के रूप में पेश किया. चूंकि बनिया समुदाय देश का अब तक का सबसे ताक़तवर औद्योगिक और व्यापारिक समुदाय है, (इसलिए) उसने मोदी को अपने में से ही एक माना और उनका स्वागत दोनों बाहें फैला कर किया. यह सिर्फ़ 2014 के आम चुनावों के दौरान हुआ कि मोदी को अचानक अपने पिछड़े होने का ख्याल आया.’

मंडल कमीशन वाली ओबीसी सूची में नरेंद्र मोदी का समुदाय नहीं था

कांचा इलैया जैसे अन्य कई जानकारों के मुताबिक़ नरेंद्र मोदी जिस मोध घांची समाज से आते हैं, उन्हें गुजरात में पिछड़ा या नीची जाति नहीं समझा जाता. वे वर्ण व्यवस्था के हवाले से कहते हैं कि इसमें पिछड़े समाज के लोगों को पढ़ने की मनाही होती है, जबकि मोध घांची समुदाय पारंपरिक रूप से साक्षर रहा है. यह बात भी ग़ौर करने वाली है कि जब मंडल आयोग की सिफ़ारिशें लागू की गईं तो पिछड़ी जातियों की सूची में मोध घांची समुदाय को शामिल नहीं किया गया था. यह काम 1994 से 1999 के बीच हुआ. यह बात इस लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण है कि हाल के सालों में सामाजिक रूप में मज़बूत समुदायों (जाट, पाटीदार, मराठा आदि) में ख़ुद को ओबीसी में शामिल कराने की होड़ देखने को मिली है. इनमें से कुछ समुदाय ऐसा कर पाने में सफल भी हुए हैं.

‘हम तेली, ठाकुरों के बाप हैं’

नरेंद्र मोदी भले ही ख़ुद को पिछड़ा बताएं, लेकिन उनके भाई प्रह्लाद मोदी कहते रहे हैं कि वे तेली समाज से हैं. साल 2018 में उन्होंने तेली समाज के इतिहास के बारे में बताते हुए कहा था कि वे और महात्मा गांधी इसी समाज के हैं. वहीं, हाल में उन्होंने छत्तीसगढ़ में फिर इस बात को दोहराया. प्रह्लाद मोदी ने कहा, ‘महात्मा गांधी ने देश को स्वतंत्रता दिलाई. वे भी तेली थे. आज देश को खा जाने वालों के एक परिवार (गांधी परिवार) को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए कोई (नरेंद्र मोदी) आया है, वह भी एक तेली का बेटा है. हम ठाकुरों के बाप हैं. जिस दिन हमारी मानसिकता पलट जाएगी सब ठीक कर देंगे.’

प्रह्लाद मोदी के इस बयान को मोध घांची समाज के पारंपरिक काम से देखे जाने की ज़रूरत है. ये लोग तेल बनाने और बेचने के व्यापार के लिए जाने जाते हैं. वर्ण व्यवस्था के हिसाब से देखें तो यह काम करने का अधिकार वैश्य समाज के लोगों के पास है. यानी भले ही मोध घांची समाज को 1999 में गुजरात में ओबीसी का दर्जा मिल गया था, लेकिन उनका सामाजिक दर्जा कभी भी पिछड़ा नहीं था.