कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में बयान दिया है कि उन्हें सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) में हितों के टकराव की वज़ह से निशाना बनाया गया. शारदा घोटाले में उनसे पूछताछ के पीछे सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव का इरादा ग़लत था. इसकी वज़ह ये थी कि नोटबंदी के बाद नागेश्वर राव और उनके परिवार के सदस्य जांच (पश्चिम बंगाल पुलिस की) के दायरे में थे.

राजीव कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफ़नामे में कहा कि नवंबर-2016 में नोटबंदी के बाद कुछ फ़र्ज़ी कंपनियों के लिए ख़िलाफ़ जांच शुरू की गई थी. इन कंपनियों के ख़ातों में बड़ी मात्रा में नगदी बरामद हुई थी. उसी जांच के दौरान एंजेला मर्सेंटाइल भी जांच के दायरे में आई. इस कंपनी ने अनधिकृत तौर पर आम जनता से पैसा जुटाया था. इस कंपनी की जांच में आगे नागेश्वर राव की पत्नी और बेटी का नाम सामने आया था.

उन्होंने अपने 89 पेज हलफ़नामे में भारतीय जनता पार्टी के दो नेताओं- मुकुल रॉय और कैलाश विजयवर्गीय पर भी आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं की बातचीत की एक ऑडियो क्लिप पश्चिम बंगाल पुलिस के पास है. इसमें वे राज्य के कुछ वरिष्ठ पुलिस अफसरों काे निशाना बनाने की बात कर रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि सीबीआई शारदा घोटाले के सिलसिले में राजीव कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है. शारदा चिटफंड घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने से पहले राजीव के नेतृत्व वाला विशेष दल कर रहा था. कहा जा रहा है कि उन्होंने कई सबूत-दस्तावेज़ आदि सीबीआई काे नहीं सौंपे हैं. इसीलिए सीबीआई ने उन्हें हिरासत में लेने की सुप्रीम कोर्ट से इजाज़त मांगी है. इस पर अदालत ने उनसे ज़वाब मांगा था.