लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार और मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में आरोपित साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने मुंबई हमले के शहीद हेमंत करकरे को लेकर दिए अपने विवादित बयान पर माफ़ी मांग ली है. लेकिन इसके बावजूद सोशल मीडिया पर उनकी बात अब दूर तलक जाती दिख रही है. इसकी ज़द में ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ गए हैं.

इस समय फ़ेसबुक और ट्विटर जैसे प्लेटफ़ॉर्मों पर प्रधानमंत्री मोदी का एक वीडियो वायरल हो रहा है. यह वीडियो उनके मुंबई हमले के दौरान दिए एक वक्तव्य का है. वीडियो के साथ कैप्शन में दावा किया गया है, ‘2008 में मोदी ने हेमंत करकरे के शहीद होने के बाद उनकी पत्नी कविता करकरे के लिए एक करोड़ रुपये (देने) की घोषणा की थी जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था. 11 साल बाद मोदी ने मालेगांव (बम धमाके की) आरोपित साध्वी प्रज्ञा को टिकट दिया है जिन्होंने करकरे की मौत का जश्न मनाया और उन्हें देश-विरोधी कहा.’

इस कैप्शन के साथ नरेंद्र मोदी का यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है. लेकिन ग़ौर करने वाली बात यह है कि जो बात कैप्शन में कही गई है, वैसा कुछ भी मोदी ने अपने बयान में नहीं कहा था. उन्होंने एक बात यह कही थी कि वे हेमंत करकरे के परिवार से मिले. मोदी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे और उस नाते उन्होंने दूसरी बात यह कही थी कि उनकी सरकार मुंबई हमले में शहीद हुए जवानों के लिए सम्मान राशि के रूप में एक करोड़ रुपये देगी. अकेले हेमंत करकरे की पत्नी (या परिवार) को एक करोड़ रुपये देने की बात उन्होंने कहीं नहीं की.

इंडियन एक्सप्रेस की 30 नवंबर, 2008 की रिपोर्ट से यह भी साफ़ हो जाता है कि बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने निजी रूप से भी कविता करकरे को एक करोड़ रुपये देने की पेशकश नहीं की थी. अख़बार के मुताबिक़ यह बात ख़ुद कविता ने कही थी. रिपोर्ट में उनके हवाले कहा गया था, ‘यह हमारी संस्कृति है कि घर आने वालों का आदर करें, और मोदी एक बुज़ुर्ग व्यक्ति हैं. वे घर आए, लिविंग रूम में कुछ देर बैठे और बेटे आकाश से बोले, ‘आपको कोई मदद चाहिए तो बताइएगा.’ उन्होंने कहीं भी पैसे की मदद देने की बात नहीं की, कम से कम मेरे सामने तो नहीं.’

वहीं, आउटलुक की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ महाराष्ट्र सरकार ने साफ़ किया था कि गुजरात सरकार द्वारा घोषित एक करोड़ रुपये की सम्मान राशि अकेले हेमंत करकरे के परिवार के लिए नहीं, बल्कि आतंकी हमले में शहीद हुए महाराष्ट्र पुलिस के सभी 14 जवानों के परिवारों के लिए थी. इस रिपोर्ट में भी बताया गया है कि मोदी ने करकरे के घर जाकर उनकी पत्नी के सामने आर्थिक मदद से जुड़ा कोई प्रस्ताव नहीं दिया था.

इस जानकारी से साफ़ है कि साध्वी प्रज्ञा के विवादित बयान से नरेंद्र मोदी को जोड़कर किया गया यह दावा तथ्यों से मेल नहीं खाता. वहीं, पूरी जानकारी यह है कि मुंबई हमले से पहले ख़ुद नरेंद्र मोदी ने मालेगांव ब्लास्ट मामले की एटीएस की जांच पर सवाल खड़े किए थे. यह जांच हेमंत करकरे के ही नेतृत्व में हो रही थी. यह भी बता दें कि हेमंत करकरे की शहादत से दुखी उनके परिवार ने नरेंद्र मोदी समेत सभी राजनेताओं से मिलने से इनकार कर दिया था. लेकिन मोदी फिर भी बिना बताए उनके घर पहुंच गए थे.

(अगर आपके पास सोशल मीडिया के ज़रिए ऐसी कोई जानकारी (ख़बर, तस्वीर या वीडियो) आई है, जिसके सही होने पर आपको संदेह हो तो उसे हमें dushyant@satyagrah.com पर भेज दें. हम उसकी जांच कर सच सामने लाने का प्रयास करेंगे.)