उद्योगपति मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने बंद पड़ी जेट एयरवेज (जेई) में रुचि दिखाई है. इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है. अखबार ने यह भी बताया कि मुकेश अंबानी की कंपनी सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया को भी कर्ज से उबारने की संभावना तलाश रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस अकेली कंपनी नहीं है जो जेट एयरवेज हिस्सेदारी की संभावना तलाश रही है. एक सूत्र ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर बताया कि संयुक्त अरब अमीरात स्थित एतिहाद एयरवेज ने भी जेई को खरीदने में रुचि दिखाई है. इस समय जेई में उसकी 24 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. प्रत्यक्ष विदेश निवेश (एफडीआई) के मौजूदा नियमों के तहत वह इसे 49 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है. इसके लिए उसे सरकार से मंजूरी लेनी होगी. वहीं, नागरिक उड्डयन से जुड़े एफडीआई नियम अनिवासी भारतीयों को ऑटोमैटिक रूट के जरिये एयर लाइनों की सौ प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति देते हैं.
उधर, इस बारे में जब रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रवक्ता से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, ‘कंपनी की पॉलिसी के तहत हम मीडिया में चल रही अटकलबाजी पर टिप्पणी नहीं करते. हमारी कंपनी लगातार अनेक अवसरों का मूल्यांकन करती है. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमों और स्टॉक एक्सचेंज से किए समझौतों का पालन करते हुए हमने पहले भी जरूरी जानकारियां साझा की हैं और आगे भी करते रहेंगे.’
खबर के मुताबिक एक सूत्र ने कहा कि एयर लाइन को फंड मुहैया कराने और कर्जदाताओं को लेकर बातचीत अभी चल रही है. उसके मुताबिक यह एक मुख्य वजह है जिसके चलते जेट एयरवेज को अपना कामकाज बंद करना पड़ा है. वहीं, एक अन्य सूत्र ने कहा कि एयर इंडिया में रुचि दिखाना रिलायंस की पूरी योजना का एक हिस्सा है. उसने कहा, ‘यह बोर्डरूम की रणनीति है जिस पर बाद में विचार किया जा सकता है. दूसरे पक्षों का कहना है कि अभी उनके पास समय है, इसलिए बातचीत धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है.’
पिछले वित्तीय वर्ष में जेट एयरवेज और एयर इंडिया दोनों में घाटे में रही थीं. जेट एयरवेज की हालत इतनी खराब है कि 25 सालों तक उड़ान सेवाएं देने के बाद उसे अपना संचालन अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है. भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले ऋणदाता समूह ने एयरलाइन को 983 करोड़ रुपये की अंतरिम आपातकालीन आर्थिक मदद देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद एयरलाइन को बंद करने का फैसला किया गया. इससे जेट एयरवेज के हजारों कर्मचारी एक झटके में बेरोजगार हो गए हैं.
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