सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई के खिलाफ एक महिला द्वारा लगाये गए यौन उत्पीड़न के आरोपों पर सुनवाई पूरी कर ली है. यह मामला सामने आने के बाद सीजेआई ने इसकी तुरंत सुनवाई के लिए न्यायाधीश अरुण मिश्रा और न्यायाधीश संजीव खन्ना की दो सदस्यीय पीठ गठित की थी.

पीटीआई के मुताबिक सुनवाई के दौरान सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता ‘ बेहद गंभीर खतरे ’में है. उन्होंने कहा, ‘यह (आरोप) अविश्वसनीय है. मुझे नहीं लगता कि इन आरोपों का खंडन करने के लिए मुझे इतना नीचे उतरना चाहिए. कोई मुझे पैसे के मामले में नहीं पकड़ सकता है, लोग कुछ ढूंढना चाहते हैं और उन्हें यह मिला. इसके पीछे कोई बड़ी ताकत होगी. वे सीजेआई के कार्यालय को निष्क्रिय करना चाहते हैं.’

जस्टिस गोगोई ने आगे कहा, ‘न्यायाधीश के तौर पर 20 साल की निस्वार्थ सेवा के बाद मेरा बैंक बैलेंस 6.80 लाख रुपये है. 20 साल की सेवा के बाद यह सीजेआई को मिला इनाम है. मैं इस कुर्सी पर बैठूंगा और बिना किसी भय के न्यायपालिका से जुड़े अपने कर्तव्य पूरे करता रहूंगा. मैंने आज अदालत में बैठने का असामान्य और असाधारण कदम उठाया है, क्योंकि चीजें बहुत आगे बढ़ चुकी हैं. न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता.’

सीजेआई के मुताबिक इस तरह के अनैतिक आरोपों से न्यायपालिका पर से लोगों का विश्वास डगमगाएगा. उन्होंने कहा, ‘न्यायिक प्रणाली में लोगों के विश्वास को देखते हुए हम सभी न्यायपालिका की स्वंतत्रता को लेकर चिंतित हैं.’ हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सीजेआई गोगोई ने कहा कि उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप इसलिए लगाए गए क्योंकि अगले हफ्ते वे एक संवेदनशील मामले की सुनवाई करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘मेरी सेवा के अभी सात महीने बचे हैं. इस दौरान मामलों की सुनवाई कर फैसले देने हैं.’

सीजेआई ने यह भी कहा कि जिस महिला ने उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए उसका आपराधिक इतिहास रहा है. उनके मुताबिक महिला के खिलाफ दो एफआईआर पहले से दर्ज हैं. गौरतलब है कि महिला सीजेआई के घर में बतौर जूनियर असिस्टेंट काम करती थी. पिछले साल रजिस्ट्री कार्यालय में उसके खिलाफ अनुचित व्यवहार करने की शिकायत की गई थी. उसके बाद उसे निकाल दिया गया था.