कॉल सेंटर घोटाले के आरोपित एक भारतीय नागरिक को सिंगापुर से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया है. अरबों डॉलर के इस घोटाले के मार्फ़त अमेरिकी नागरिकों को ख़ास तौर पर निशाना बनाया गया था. उसे पिछले साल सितंबर में अमेरिका के आग्रह पर सिंगापुर में ग़िरफ़्तार किया गया था. वह तब भारत से सिंगापुर पहुंचा था.

ख़बरों के मुताबिक इस कॉल सेंटर घोटाले का आरोपित हितेश मधुभाई पटेल अहमदाबाद का रहने वाला है. उसकी उम्र 42 साल के क़रीब है. हितेश को अक्टूबर 2016 में सिंगापुर की अदालत ने दोषी ठहराया था. उसके अलावा इस मामले में 60 अन्य आरोपित हैं. इन सभी पर षड्यंत्र, धाेखाधड़ी, काले धन को वैध करने की साज़िश आदि के आरोप सिद्ध हुए हैं. सिंगापुर के कानून मंत्री ने इसी साल 25 मार्च को एक आदेश जारी किया था. इसके जरिए हितेश पटेल को अमेरिका प्रत्यर्पित करने की अनुमति दी गई थी.

आरोपों के अनुसार हितेश ‘एचग्लोबल’ के नाम से कॉल सेंटरों की चेन संचालित करता था. उसका मुख्य केंद्र अहमदाबाद में ही है. इन कॉल सेंटरों में बैठे लोगों ने तमाम अमेरिकी नागरिकों को फोन किए. ये फोन नंबर दलालों आदि के जरिए हासिल किए गए थे. जिन नागरिकों को फोन किया गया उन्हें कॉल सेंटरों के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे अमेरिका की आंतरिक राजस्व सेवा (आईआरएस) या अमेरिकी नागरिक और आव्रजन सेवा के अधिकारी हैं. फिर इन नागरिकाें को बताया गया कि उन पर काफ़ी कर बकाया हो चुका है.

कॉल सेंटरों के प्रतिनिधियों ने आम नागरिकों को चेतावनी भी दी कि अगर उन्होंने अमेरिकी सरकार को बकाया कर नहीं चुकाया तो वे ग़िरफ़्तार किए जा सकते हैं. उन्हें क़ैद में डाला जा सकता है या उन्हें उनके देश (अगर वे किसी और देश के मूल नागरिक हैं तो) वापस भेजा जा सकता है. डरे हुए नागरिक जब कर चुकाने या आर्थिक दंड जमा कराने को राज़ी हो गए तो उनसे ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए निश्चित रकम हासिल कर ली गई. इस काम में अमेरिका के कुछ साज़िशकर्ताओं ने भी हितेश और उसके साथियों की मदद की है.