रफाल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के हवाले से दिए अपने बयान के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खेद जता दिया है. सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष ने शीर्ष अदालत में कहा कि उन्होंने चुनाव अभियान की गर्मी में वह बयान दे दिया था. लेकिन उनका इरादा राजनीतिक विवाद (रफाल विमानों की ख़रीद से जुड़े) में अदालत को घसीटना क़तई नहीं था.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच अब मंगलवार को तय करेगी कि राहुल गांधी द्वारा खेद जताए जाने के बाद अब इस मामले में आगे क्या किया जाए. ग़ौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने बीती 16 अप्रैल को दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी की सांसद मीनाक्षी लेखी की अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए राहुल गांधी से स्पष्टीकरण मांगा था. मीनाक्षी लेखी ने 12 अप्रैल को अदालत में अर्ज़ी लगाई थी. इसमें उन्होंने कहा था कि रफाल मामले में राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में भ्रम फैला रहे हैं.

मीनाक्षी की तरफ़ से पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया, ‘राहुल गांधी ने टिप्पणी की है कि अब तो ‘सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि चौकीदार (नरेंद्र मोदी के लिए) जी ने चोरी की’ है.’ इसी बयान के आधार पर मीनाक्षी ने कांग्रेस अध्यक्ष के ख़िलाफ़ अदालत की आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी.

ध्यान रखने की बात यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट ने रफाल मामले में पहले केंद्र सरकार काे क्लीन चिट दे दी थी. इस सौदे की प्रक्रिया या कीमत आदि के मसले पर सुनवाई से इंकार कर दिया था. लेकिन फिर याचिकाकर्ताओं ने कुछ दस्तावेज़ पेश कर इस फ़ैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की. इस पर सरकार की ओर से दलील दी गई कि अदालत में पेश गोपनीय दस्तावेज़ चोरी से हासिल किए गए हैं. इन्हें सबूत नहीं माना जा सकता. लेकिन अदालत ने केंद्र सरकार की दलील को ख़ारिज़ कर दिया. साथ ही याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश दस्तावेज़ के आधार पर मामले में पुनर्विचार को भी राज़ी हो गई. राहुल गांधी ने इसी फ़ैसले के बाद प्रधानमंत्री पर टिप्पणी की थी.