म्यांमार के सुप्रीम कोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के दोनों पत्रकारों- वा लोन और क्यॉ सो ऊ की अंतिम अपील ख़ारिज़ कर दी है. इसका अर्थ ये है कि अब इन दोनों को सात साल क़ैद की अपनी सज़ा काटनी होगी.

ख़बरों के मुताबिक रॉयटर्स के दोनों पत्रकारों को रोहिंग्या मुस्लिमों पर म्यांमार की सेना के अत्याचारों की ख़बरें प्रकाशित करने की वज़ह से यह सज़ा सुनाई गई है. इन दोनों को दिसंबर- 2017 में ग़िरफ़्तार किया गया था. उन पर अनधिकृत तरीके से गोपनीय दस्तावेज़ हासिल करने का आरोप लगाया गया था. जबकि इनकी सज़ा का ऐलान बीते साल सितंबर हुआ था. इसके ख़िलाफ़ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. लेकिन शीर्ष अदालत ने बिना कोई पुख़्ता कारण बताए उनकी अपील ख़ारिज़ कर दी.

हालांकि दोनों पत्रकारों ने दलील दी थी कि उन्हें पुलिस ने फंसाया है. उन पर झूठे आरोप लगाए हैं. लेकिन म्यांमार की अदालतों में इन दलीलों को नहीं सुना गया. ग़ौरतलब है कि दोनों पत्रकार अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त हैं. उन्हें उनके काम के लिए पत्रकारिता जगत का सर्वश्रेष्ठ पुलित्ज़र पुरस्कार हासिल हो चुका है. यह जानकारी उन्होंने ख़ुद इसी महीने की शुरूआत में साझा की थी. उन्हें सज़ा सुनाए जाने की तमाम अंतरराष्ट्रीय मंचों से आलोचना की गई है. इसे ‘प्रेस की स्वतंत्रता का हनन’ बताया गया है.