श्रीलंका में बीते रविवार को कई बम धमाके हुए थे. अब आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने इनकी जिम्मेदारी ली है. श्रीलंका की सरकार का मानना है कि ये धमाके कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन नेशनल तौहीद जमात यानी एनटीजे ने आईएस की मदद से किये थे. पिछले कुछ महीनों के दौरान श्रीलंकाई ख़ुफ़िया एजेंसियों ने कई बार एनटीजे द्वारा हमले किए जाने का अलर्ट भी जारी किया था.

नेशनल तौहीद जमात एक इस्लामिक चरमपंथी संगठन है. यह श्रीलंका के पूर्वी प्रांत में ज्यादा सक्रिय है. यह संगठन कट्टरपंथी संदेश और इस्लाम की वहाबी विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए भी जाना जाता है. इसके अलावा नेशनल तौहीद जमात श्रीलंका में महिलाओं के बुर्का पहनने और मस्जिदों के निर्माण के साथ शरिया कानून का भी हिमायती है.

श्रीलंकाई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 2014 में एनटीजे का गठन मौलवी और इस्लामिक उपदेशक ज़हरान हाशिम ने किया था. इसके करीब एक साल बाद यह संगठन तब चर्चा में आया था, जब इसके सचिव अब्दुल राजिक ने बहुसंख्यक बौद्ध समुदाय के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिया था. राजिक को अपने आपत्तिजनक बयानों के लिए 2016 में गिरफ्तार भी किया गया था. आक्रोश बढ़ने के बाद उसने अपने बयानों को लेकर माफ़ी भी मांगी थी.

चरमपंथी संगठन एनटीजे पर इससे पहले भी हिंसा भड़काने का आरोप लग चुका है. इस संगठन ने पिछले साल कई बौद्ध मंदिरों में तोड़फोड़ की थी और बुद्ध की मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया था. इसके बाद श्रीलंका के कई इलाकों में बौद्ध और मुस्लिमों के बीच तनाव बढ़ गया था.

एनटीजे का आईएस से नाता

श्रीलंका की सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक एनटीजे का आईएस से गहरा जुड़ाव है और आईएस एनटीजे को अपनी श्रीलंकाई शाखा के तौर पर देखता है. साल 2014 में तत्कालीन श्रीलंकाई रक्षा मंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि खुफिया जानकारी के मुताबिक एनटीजे के तार आईएस से जुड़े हुए हैं.

बीते मंगलवार को आईएस की ओर से आत्मघाती हमलावरों की जो तस्वीरें जारी की गयी हैं, उनमें एक हमलावर का नाम अबु उबैदा है. श्रीलंकाई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अबु उबैदा का असली नाम ज़हरान हाशिम है. वही जो एनटीजे का संस्थापक और उपदेशक है. ज़हरान के गांव के लोगों का कहना है कि वह करीब दो साल पहले देश से बाहर गया था. माना जा रहा है कि इसी दौरान वह आईएस के संपर्क में आया.

श्रीलंकाई समाचार पत्र संडे टाइम्स ने यह भी बताया है कि भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों ने श्रीलंका सरकार को सूचना दी है कि ज़हरान हाशिम की मौत के बाद अब उसका भाई नौफर मौलवी एनटीजे की कमान संभालने के लिए कतर से श्रीलंका वापस आ चुका है. उसकी टीम जल्द ही श्रीलंका में और हमले कर सकती है.

श्रीलंका सरकार ने पहले ही किसी बाहरी संगठन का हाथ होने का दावा किया था

श्रीलंकाई सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने पहले ही बम धमाकों के तार देश के बाहर तक जाने की बात कही थी. श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री और वहां की सरकार के प्रवक्ता राजिथा सेनारत्ने का कहना था, ‘इस हमले को श्रीलंका का एक छोटा सा आतंकी संगठन अपने दम पर अंजाम नहीं दे सकता, कोई बड़ा और बाहरी संगठन है जिसने इस हमले में यहां के संगठन की मदद की है.’ सेनारत्ने ने आगे कहा, ‘हम जांच कर रहे हैं कि यह बाहरी ताकत कौन सी है जिसने यहां आत्मघाती हमलावर तैयार किए और इसने इस तरह के खतरनाक बम बना लिए.’ श्रीलंकाई राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से भी कहा गया है कि इस हमले में किसी विदेशी आतंकी संगठन ने श्रीलंका स्थित आतंकियों की मदद की है और इन्हें पहचानने के लिए अन्य देशों की मदद ली जा रही है.

इस हमले में आईएस का हाथ होने की संभावना जताए जाने की एक वजह और भी थी. श्रीलंकाई सुरक्षा विशेषज्ञ रोहन गुणरत्ना का एक ब्रिटिश न्यूज़ एजेंसी से कहना था, ‘इस हमले का तरीका बिलकुल वैसा ही है जैसा इराक और सीरिया में आईएस और अलकायदा अपनाते आए हैं. ऐसे में इस हमले में इन संगठनों की भूमिका जरूर है.’ कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना था कि आईएस पर शक इसलिए ज्यादा है क्योंकि 2015-16 में कई श्रीलंकाई युवक आईएस में शामिल होने इराक और सीरिया गए थे और इन्होने वहां प्रशिक्षण भी लिया था. इसके बाद ऐसी खबरें आई थीं कि इस संगठन ने कुछ लड़ाके विशेषतौर पर बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार और भारत में हमले के लिए तैयार किए हैं.