अमेरिका ने ईरान से तेल कारोबार के लिए भारत को दी जा रही छूट को वापस ले ली है. इसके बाद खबरें आ रही हैं कि अगले महीने से भारत ईरान से तेल आयात बंद कर देगा. देश की जरूरत का ज्यादातर तेल यहीं से आता है.

अमेरिका ने अपने इस फैसले के पीछे पुलवामा आतंकी हमले और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर का तर्क दिया है. उसने कहा है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद वह भारत के साथ खड़ा रहा. वहीं, मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कराने में भी वह भारत का भरपूर साथ दे रहा है. इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के मुताबिक इसके बदले अमेरिका भारत से उम्मीद रखता है कि वह ईरान के ‘आतंकी नेटवर्क’ को नाकाम करने की डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिबद्धता में उसका साथ दे.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की अंतरराष्ट्रीय आतंकियों की सूची में मसूद अजहर का नाम शामिल कराने के लिए अमेरिका काफी प्रयास कर रहा है. इस सिलसिले में विदेश सचिव विजय गोखले बीती 11 मार्च को अमेरिका गए थे क्योंकि 13 मार्च को मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कराने की समयसीमा खत्म हो रही थी. हालांकि अमेरिका समेत ब्रिटेन और फ्रांस के जबर्दस्त प्रयासों के बावजूद भारत अजहर को सूची में शामिल नहीं करा पाया क्योंकि हमेशा की तरह चीन ने ऐन वक्त पर इससे जुडे़ प्रस्ताव के साथ जाने से इनकार कर दिया. भारत का काम नहीं हुआ, लेकिन इसके लिए किए गए प्रयासों के बदले अमेरिका ईरान को घेरना चाहता है. इसीलिए उसने भारत समेत अन्य सभी देशों को ईरान से तेल कारोबार रोकने को कहा है.

अमेरिका के इन्हीं प्रयासों के चलते पिछले साल ईरान को तेल व्यापार से आमदनी नहीं हो पाई. अमेरिका का तर्क है कि अगर ऐसा होता तो ईरान उस पैसे का इस्तेमाल हमास और हिजबुल्लाह जैसे आतंकी संगठनों को मदद देने में करता और अपना मिसाइल कार्यक्रम जारी रखता जो यूएनएसी के 2231 प्रस्ताव के खिलाफ है. इस आधार पर उसने पिछले साल ईरान से तेल आयात करने वाले सभी देशों को चेतावनी जारी की थी. इनमें भारत भी शामिल था. बाद में अमेरिका ने भारत समेत कुछ देशों को छूट दी थी. लेकिन अब उसने यह छूट वापस ले ली है. मंगलवार को इस पर भारत सरकार ने कहा कि वह इस फैसले से होने वाले प्रभाव से निपटने के लिए तैयार है. लेकिन अब खबर आ रही है कि सरकार दो मई से ईरान से तेल कारोबार रोक देगी.

बहरहाल, इस मुद्दे पर भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच बातचीत चल रही है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी एलिस वेल्स इस समय इस मुद्दे पर बातचीत के लिए भारत के दौरे पर हैं. वहीं, अमेरिका ने भारतीय अधिकारियों से कहा है कि उसने ईरान पर और ज्यादा दबाव बनाने के लिए यह कदम उठाया है, जिसका मकसद भारत को निशाना बनाना नहीं है. उसने साफ किया है कि ईरान को लेकर उसके इस कदम का चाबहार बंदरगाह परियोजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा.