बीते साल के आख़िर में बनी मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार एक तरफ़ तो राज्य का सरकारी ख़ज़ाना खाली बता रही है. दूसरी तरफ़ मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके ख़ास लोगों के ख़र्चाें में किसी तरह की कटौती न होने की ख़बरें भी लगातार आ रही हैं. मिसाल के तौर पर अभी हाल ही में आरटीआई (सूचना का अधिकार) के ज़रिए सामने आई जानकारी में बताया गया है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके तीन अफ़सरों की स्विट्ज़रलैंड यात्रा पर 1.58 करोड़ रुपए से ज़्यादा ख़र्च कर दिए गए.

द इकॉनॉमिक टाइम्स के अनुसार मुख्यमंत्री कमलनाथ इसी साल जनवरी में विश्व आर्थिक फोरम की बैठक में हिस्सा लेने दावोस, स्विट्ज़रलैंड गए थे. उनके राज्य के मुख्य सचिव सुधीर रंजन मोहंती, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव अशोक बर्णवाल और औद्योगिक नीति तथा निवेश संवर्धन विभाग के प्रमुख सचिव मोहम्मद सुलेमान भी थे. इस यात्रा को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि अगर ‘प्रतिनिधिमंडल दावोस न जाता तो मध्य प्रदेश निवेश संवर्धन का एक बड़ा अवसर खो देता.’

हालांकि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले कार्यकर्ता अजय दुबे का कहना है, ‘जब राज्य पर पहले ही कर्ज़ का बोझ बढ़ा हुआ है. ख़ज़ाना खाली है. तब ऐसे में इस यात्रा काे नहीं तो कम से कम उस पर भारी-भरकम ख़र्च काे टाला जा सकता था. करदाताओं के पैसे का इसकी जगह कुछ और बेहतर इस्तेमाल हो सकता था.’ ग़ौरतलब है कि आरटीआई के जरिए मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके अफ़सरों की स्विट्ज़रलैंड यात्रा पर किए गए ख़र्च की जानकारी अजय दुबे ने ही हासिल की है.