मध्य प्रदेश के भोपाल से भाजपा की लोकसभा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर अपने एक और बयान को लेकर चर्चा में हैं. कुछ दिन पहले उन्होंने दावा किया कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराने में वे ख़ुद शामिल थीं. अयोध्या मसले पर अपनी बात कहते हुए प्रज्ञा ठाकुर ने कहा था, ‘राम मंदिर हम बनाएंगे और भव्य बनाएंगे. हम तोड़ने गए थे (बाबरी मस्जिद का) ढांचा. मैंने चढ़ कर तोड़ा था ढांचा. मुझे ईश्वर ने शक्ति दी थी. हमने देश का कलंक मिटाया है.’

प्रज्ञा ठाकुर के इसी बयान को लेकर सोशल मीडिया पर उनका मज़ाक़ उड़ाया जा रहा है. इसी सिलसिले में कहा जा रहा है कि साध्वी का जन्म तो 1988 में हुआ था. ऐसे में महज़ चार साल की उम्र में वे कैसे बाबरी मस्जिद पर चढ़ कर उसे तोड़ सकती हैं. फ़ेसबुक, ट्विटर पर यह बात कहने वालों में नेता व पत्रकार समेत जानकार लोग शामिल हैं.

यूं तो साध्वी प्रज्ञा ने हाल में कई हास्यास्पद बयान दिए हैं. लेकिन बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर उनका बयान गंभीरता से लिया जाना चाहिए क्योंकि उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के समय उनकी उम्र चार नहीं, बल्कि 20 से 22 वर्ष की रही होगी. रिपोर्टों के मुताबिक़ साल 2017 में साध्वी ने मालेगांव मामले में ज़मानत के लिए जो अर्ज़ी दाख़िल की थी, उसमें उन्होंने अपनी उम्र 44 वर्ष बताई थी. इस हिसाब से उनका जन्म 1972 का होना चाहिए.

वहीं, इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ साध्वी की बड़ी बहन उपमा सिंह का कहना है कि भाजपा प्रत्याशी का जन्म दो फ़रवरी, 1970 को हुआ था. यानी इस लिहाज़ से 1992 में प्रज्ञा ठाकुर की उम्र 22 वर्ष रही होगी और इस समय उनकी उम्र 49 वर्ष होनी चाहिए. बता दें कि लोकसभा चुनाव के अपने हलफ़नामे में साध्वी ने अपनी उम्र 49 साल ही बताई है. कुछ रिपोर्टों में उनकी उम्र में आए अंतर को लेकर सवाल उठाए गए हैं कि 2017 में ख़ुद को 44 की बता रहीं साध्वी, 2019 में 49 साल की कैसे हो गईं. हालांकि इतना तय है कि साध्वी बाबरी विध्वंस के समय चार वर्ष की नहीं थीं.

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