अमेरिका के जाने-माने हस्तलेख विशेषज्ञ कार्ल बैगेट ने कहा है कि भारत में गुमनामी बाबा नाम से मशहूर व्यक्ति ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे. उन्होंने गुमनामी बाबा और नेताजी द्वारा लिखे गए पत्रों का विश्लेषण करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है. अब तक 5,000 से ज्यादा केस देख चुके बैगेट का कहना है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजादी के बाद एकांत जीवन बिताया था. उनके इस दावे के बाद इस सवाल को लेकर बहस फिर छिड़ सकती है कि नेताजी की मौत विमान हादसे में हुई थी या नहीं.

कार्ल बैगेट को पूरे अमेरिका में लिखित दस्तावेजों की जांच का विशेषज्ञ माना जाता है. टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक उन्हें लेखकों की पहचान बताए बिना हाथ से लिखे पत्रों के दो सैट दिए गए थे. दोनों की जांच के बाद बैगेट ने कहा कि ये पत्र एक व्यक्ति द्वारा लिखे गए थे. इसके बाद बैगेट को नेताजी के बारे में बताया गया. खबर के मुताबिक उसके बाद भी बैगेट अपने निष्कर्ष पर हस्ताक्षर के साथ कायम रहे.

बहरहाल, बैगेट को सौंपे गए ये पत्र चंद्रचूड़ घोष और अनुज धर द्वारा लिखी गई किताब ‘कॉननड्रम : सुभाष बोसेज लाइफ आफ्टर डेथ’ में शामिल किए गए थे. गुमनामी बाबा ने 1962 से 1982 के बीच पवित्र मोहन रॉय को ये पत्र लिखे थे. रॉय आजाद हिंद फौड (आईएनए) में काम कर चुके थे और नेताजी के करीबी थे. किताब के मुताबिक वे गुमनामी बाबा के संपर्क में रहते थे और कई सालों तक उनसे मिलते रहे.

किताब में कोई 10,000 दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी मिलती है. इनमें आईएनए के उन अन्य सदस्यों द्वारा लिखे गए दस्तावेज भी शामिल हैं जो गुमनामी बाबा से मिले थे. चंद्रचूड़ घोष और अनुज धर ने आरटीआई के जरिये जस्टिस मुखर्जी आयोग से ये दस्तावेज हासिल किए थे. दोनों लेखकों ने इन दस्तावेजों की जांच अमेरिकी विशेषज्ञ बैगेट से कराई. उन्होंने उन पत्रों का बोस द्वारा लिखे गए पत्रों से मिलान करने के बाद निष्कर्ष निकाला कि वे एक ही व्यक्ति द्वारा लिखे गए थे.

गौरतलब है कि साल 1945 की एक विमान दुर्घटना में सुभाष चंद्र बोस के मारे जाने का दावा किया जाता है. यह भी दावा है कि उनकी अस्थियों को टोक्यो के रेनकोजी मंदिर में रखा गया था. लेकिन इस दावे को कई बार चुनौती दी गई है. भारत में कई लोगों का मानना है कि उस विमान हादसे में नेताजी की मृत्यु नहीं हुई थी और वे भारत वापस आने में कामयाब रहे थे.

लेकिन वापस आकर उन्होंने सार्वजनिक जीवन नहीं जिया और उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में गुमनामी बाबा के नाम से रहने लगे. लेकिन भारत वापस आने के बाद नेताजी लोगों के सामने क्यों नहीं आए. इसे लेकर किताब कहती है कि संभवतः रूस की कैद में मिली प्रताड़ना के चलते बोस को मानसिक आघात पहुंचा था.