देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई के ख़िलाफ़ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप किसी साज़िश का हिस्सा तो नहीं हैं, यह पता लगाने की ज़िम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एके पटनायक को सौंपी गई है. सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों- जस्टिस अरुण मिश्रा, आरएफ नरीमन और दीपक गुप्ता की बेंच ने गुरुवार को यह आदेश जारी किया.

बेंच ने इसके साथ यह भी स्पष्ट किया कि सीजेआई रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के जो आरोप लगाए गए हैं उनकी आंतरिक जांच भी अलग से जारी रहेगी. हालांकि इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया, ‘सीजेआई काे फंसाने की साज़िश का आरोप अपने आप में इतना गंभीर है कि उसकी स्वतंत्र जांच की ज़रूरत है. जब भी किसी मामले में बड़े लोग शामिल होते हैं तो इस तरह की चीजें होती हैं. लिहाज़ा अब वक़्त आ गया है जब हम उठ खड़े हों और अमीर तथा ताक़तवर लोगों को बताएं कि आप इस संस्थान (न्यायपालिका) को ऐसे नहीं चला सकते.’

ग़ौरतलब है कि बीते शनिवार को रंजन गोगोई के स्टाफ की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के एक वकील उत्सव सिंह बैंस ने अदालत में हलफ़नामा देकर कहा कि ये आरोप सीजेआई को फंसाने की बड़ी साज़िश का हिस्सा हैं. उन्हाेंने यह भी दावा किया था कि बड़े कारोबारी घराने से जुड़े एक व्यक्ति ने उन्हें (बैंस को) भी इसी काम को करने के एवज़ में 1.5 करोड़ रुपए देने की पेशकश की थी. सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच उत्सव सिंह के इसी आरोप के मसले पर सुनवाई कर रही है.