बीमा कंपनियां किसानों के फसल बीमा से जुड़े करोड़ों रुपये दबा कर बैठी हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक फसल बीमा के लिए अधिकृत देश की 18 बीमा कंपनियां किसानों को उनके हक की रकम नहीं दे रही हैं. इससे किसानों की मुसीबत तो बढ़ ही रही है, सरकार को भी बीमा कंपनियों पर जुर्माना लगाना पड़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक हाल के सालों में किसानों ने एक के बाद एक जो विरोध-प्रदर्शन किए, उनके पीछे एक बड़ी वजह फसल बीमा मिलने में हो रही देरी भी है.

हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक अक्टूबर 2018 में लाए गए एक नए कानून के मुताबिक अगर बीमा कंपनियां फसल बीमा से जुड़े क्लेम के पैसे देने में देरी करती हैं तो उन्हें जुर्माना देना पड़ेगा. इस कानून को लागू किए जाने के बाद इस समस्या का असली चेहरा सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च, 2019 तक बीमा-कंपनियों ने किसानों के फसल बीमा के करीब 530 करोड़ रुपये रोके हुए थे. हालांकि इसमें से कुछ पैसा अब किसानों को दिया गया है. इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने अखबार को बताया कि इस देरी के लिए लगभग आठ कंपनियों पर 16 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका गया है.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को कुल प्रीमियम का एक से दो प्रतिशत हिस्सा देना होता है. बाकी प्रीमियम केंद्र और संबंधित राज्य सरकार देती हैं. यह योजना इसलिए लाई गई क्योंकि कृषि से जुड़ी तमाम समस्याओं के मद्देनजर किसान बीमा जरूरी हो गया था. इसी के तहत 2018 में नए नियम लाए गए. इनके मुताबिक कंपनियों को बीमा क्लेम किए जाने के 30 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा. ऐसा न होने की सूरत में उन पर बकाया राशि का 12 प्रतिशत जुर्माना लगेगा. यह इसलिए जरूरी समझा गया क्योंकि भुगतान में देरी होने की वजह से किसानों समेत पूरी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है.